क्या लालू यादव कांग्रेस को कर रहे खोखला..

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पप्पू यादव की एंट्री से बिहार कांग्रेस में विवाद

पटना। पप्पू यादव अपनी पार्टी जाप समेत कांग्रेस में शामिल हो गये हैं। इससे बिहार कांग्रेस में विवाद हो गया है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह मिलन समारोह से गायब रहे। अखिलेश ने इस पर कुछ बोलना भी जरूरी नहीं समझा।

उधर, पप्पू यादव को पता था कि अखिलेश नहीं चाहते कि वे कांग्रेस में आएं। इसलिए पप्पू यादव ने अखिलेश का नाम तक नहीं लिया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व बिहार प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा ने इसे लेकर नाराजगी जताई है।

पप्पू यादव एक आक्रामक यादव नेता हैं और उससे बिहार कांग्रेस के नेताओं में उल्लास नहीं दिख रहा है।

कांग्रेस में खटपट पर राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि पप्पू यादव ने लालू प्रसाद के प्रतिनिधि के तौर पर कांग्रेस ज्वाइन किया है।

कांग्रेस में शामिल होने के पहले पप्पू यादव, लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव से मिले। लालू प्रसाद के लाइन अप के बाद ही वे कांग्रेस में गए।

कांग्रेस नेतृत्व या पप्पू यादव को अखिलेश से बात करनी चाहिए थी। इसका असर चुनाव में दिखेगा और कांग्रेस में गुटबाजी होगी।

हालांकि पूर्णिया के इलाके में असर होगा, पर पप्पू के खिलाफ वाले कांग्रेसी घर बैठ जाएंगे।

कांग्रेस उलझन में थी। लालू प्रसाद के दबाव में आ गई। लालू प्रसाद ने पप्पू यादव को आरजेडी में शामिल नहीं करवाया, कांग्रेस में शामिल करवा दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो बिहार कांग्रेस के सुपर बॉस लालू प्रसाद आज से नहीं बल्कि पिछले 20 वर्षों से हैं।

वही प्रदेश अध्यक्ष बनवाते हैं, सीटें तय करते हैं। एक बार सोनिया गांधी ने रिश्ता तोड़ लिया था। लेकिन कोई रास्ता नहीं दिखा तो साथ आ गईं।

सांसदों की विधायकी वाले बिल को राहुल गांधी ने फाड़ दिया था। लालू प्रसाद के प्रति ही वह गुस्सा था।

मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने का फैसला भी ले लिया था। राहुल के नकारने की वजह से कानून सदन में नहीं बन सकता।

नतीजा लालू को जैसे रांची सीबीआई कोर्ट से सजा हुई तो उनकी सांसदी चली गई। अब तो राहुल, लालू से मटन बनाने की रेसिपी सीख रहे हैं। ये बदला हुआ माहौल है।

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा के अनुसार पप्पू यादव की पहचान किस रूप में है यह सभी लोग जानते हैं।

सिर्फ एक क्षेत्र से राजनीति नहीं चलती। 2010 में जब जगदीश टाइटर अध्यक्ष थे उस समय पप्पू यादव को कांग्रेस में वे एंट्री करवाना चाहते थे, लेकिन मैंने विरोध कर दिया। काफी विवाद हुआ और मैं और जगदीश टाइटर दोनों पद से हटाए गए थे।

आला कमान को कार्यकर्ताओं सहित बिहार के वरिष्ठ नेताओं की भावना देखनी चाहिए थी।

वे कहते हैं कि लालू प्रसाद कांग्रेस के पॉलिटिकल सहयोगी नहीं हैं, बल्कि बेसहारा और रहमो करम के रूप में ट्रीट कर रहे हैं। पार्टनर के साथ कोई ऐसा व्यवहार नहीं करता है।

1998 में सीताराम केसरी ने कांग्रेस से अलायंस किया था। तब भी मैंने विरोध किया था। 99 में पार्टी में रिज्युलेशन लाया कि फैसला गलत है।

2000 में जब कांग्रेस ने 23 विधायकों के साथ समर्थन दिया तब भी विरोध किया। उपचुनाव में भी मेरा विरोध प्रभारी गोहिल जी के सामने रहा। दो तिहाई मेंबर ने अलायंस का विरोध किया था।

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