Iran water strike: ईरान की ‘वॉटर स्ट्राइक’ से खाड़ी देशों में गहरा सकता है जल संकट, डिसैलिनेशन प्लांट बने निशाने पर

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Iran water strike:

तेहरान, एजेंसियां। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब एक नए खतरे की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान ने खाड़ी देशों के वाटर डिसैलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया, तो सऊदी अरब, यूएई, कतर और बहरीन जैसे देशों में गंभीर जल संकट खड़ा हो सकता है। इन रेगिस्तानी देशों में पीने के पानी का सबसे बड़ा स्रोत समुद्र के खारे पानी को शुद्ध करने वाले डिसैलिनेशन प्लांट ही हैं।

वॉटर प्लांट पर हमले से बढ़ा खतरा

रिपोर्ट के अनुसार ईरान के एक वाटर प्लांट पर हमला होने के बाद उसने बहरीन में एक डिसैलिनेशन प्लांट पर ड्रोन हमला किया था। जिस प्लांट पर हमला हुआ वह होर्मुज स्ट्रेट के पास केशम द्वीप पर स्थित है। इस हमले के बाद कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बाधित हो गई थी।

मिडिल ईस्ट के अधिकांश रेगिस्तानी देशों में प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोत बेहद सीमित हैं। इसलिए वहां समुद्र के खारे पानी को ‘डिसैलिनेशन’ तकनीक से शुद्ध कर पीने योग्य बनाया जाता है।

खाड़ी देशों की जीवनरेखा हैं ये प्लांट

फारस की खाड़ी क्षेत्र में 400 से अधिक डिसैलिनेशन प्लांट मौजूद हैं और दुनिया की कुल डिसैलिनेशन क्षमता का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं देशों में है। यदि इन प्लांट पर बड़े स्तर पर हमला होता है, तो सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ओमान, कतर और यूएई की करोड़ों आबादी को पीने के पानी के लिए संकट का सामना करना पड़ सकता है।

ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे बड़े प्लांट ड्रोन, मिसाइल या रॉकेट हमलों के लिए आसान लक्ष्य बन सकते हैं। इसके अलावा समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगें भी पानी लाने वाली पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा सकती हैं। आधुनिक डिसैलिनेशन प्लांट कंप्यूटर और सेंसर आधारित सिस्टम से चलते हैं, इसलिए साइबर हमलों का खतरा भी बना रहता है।

हमले के गंभीर परिणाम

यदि किसी बड़े वाटर प्लांट पर हमला होता है, तो उसका असर कुछ ही घंटों में दिखाई देने लगेगा। कतर, कुवैत और यूएई जैसे देशों में जल भंडार केवल कुछ दिनों के लिए ही पर्याप्त होते हैं। प्लांट बंद होते ही शहरों में पानी की किल्लत और अफरातफरी की स्थिति बन सकती है। कई प्लांट बिजली उत्पादन से भी जुड़े होते हैं, इसलिए पानी के साथ बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।

सुरक्षा के लिए किए जा रहे उपाय

खाड़ी देशों ने इन महत्वपूर्ण प्लांट की सुरक्षा बढ़ा दी है। कई जगहों पर पैट्रियट और आयरन डोम जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं। इसके अलावा बड़े भूमिगत जल भंडार बनाए जा रहे हैं और छोटे-छोटे डिसैलिनेशन प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि किसी एक प्लांट पर हमला होने पर पूरी पानी की सप्लाई प्रभावित न हो।

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