Iran toxic rain warning:
तेहरान, एजेंसियां। हाल ही में ईरान के तेल डिपो पर हुए हवाई हमलों के बाद कुछ इलाकों में काली या तेजाबी बारिश की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश का पानी काला दिखाई दे रहा है और उसमें तेल जैसी परत भी नजर आ रही है, जो इमारतों और वाहनों पर जम रही है। कई लोगों ने सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी की शिकायत भी की है। इस घटना ने विशेषज्ञों और पर्यावरण वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है।
हमलों के बाद बढ़ा प्रदूषण
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हाल में ईरान के तेल भंडारण केंद्रों पर हमलों के बाद वातावरण में भारी मात्रा में धुआं और प्रदूषक फैल गए। इस वजह से जब बारिश हुई तो हवा में मौजूद ये प्रदूषक पानी की बूंदों के साथ जमीन पर गिरने लगे, जिससे काली या तेजाबी बारिश जैसी स्थिति पैदा हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ सामान्य एसिड रेन नहीं हो सकती, बल्कि इसमें कई खतरनाक रसायनों का मिश्रण भी हो सकता है।
बारिश में मौजूद हो सकते हैं खतरनाक रसायन
वैज्ञानिकों के अनुसार इस तरह की बारिश में हाइड्रोकार्बन, बेहद महीन कण (PM2.5) और पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs) जैसे जहरीले पदार्थ शामिल हो सकते हैं। ये रसायन आमतौर पर तेल, ईंधन और औद्योगिक पदार्थों के जलने से बनते हैं। इनमें से कई रसायनों को कैंसरकारी माना जाता है।तेल डिपो में लगी आग से सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी गैसें भी बड़ी मात्रा में निकलती हैं। जब ये गैसें हवा में मौजूद नमी के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करती हैं तो सल्फ्यूरिक एसिड और नाइट्रिक एसिड बनता है। यही अम्लीय पदार्थ बारिश की बूंदों में घुलकर एसिड रेन का कारण बनते हैं।
स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर
विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह की जहरीली बारिश और धुएं के संपर्क में आने से लोगों को सिरदर्द, आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह और ज्यादा खतरनाक हो सकता है। बुजुर्ग, छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से सावधानी बरतने की जरूरत है।लंबे समय तक ऐसे प्रदूषण के संपर्क में रहने से कैंसर, हृदय रोग और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
पर्यावरण पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रदूषित बारिश नदियों और अन्य जल स्रोतों में मिलती है तो इससे जलीय जीवन और पीने के पानी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा इमारतों और सड़कों पर जमा जहरीले कण बाद में फिर से हवा में फैलकर लंबे समय तक प्रदूषण बनाए रख सकते हैं।








