Iran attacks US military bases:
तेहरान, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस्राइल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं। कतर, बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में धमाकों की खबरें सामने आई हैं। क्षेत्र में हालात तेजी से युद्ध जैसे बनते जा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने दोहा (कतर) में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल दागीं। कतर के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी पैट्रियट एयर डिफेंस प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। बहरीन ने पुष्टि की है कि अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया। वहीं, अबू धाबी और दुबई में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
ईरान के हमलों के बाद कतर, कुवैत और यूएई ने एहतियातन अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। ईरान ने भी अपना एयरस्पेस सील कर दिया है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों ने क्षेत्र के लिए उड़ानें रद्द या निलंबित कर दी हैं। हंगरी की विज एयर, जर्मनी की लुफ्थांसा, नीदरलैंड्स की केएलएम और ओमान एयर ने इजराइल और खाड़ी क्षेत्र की उड़ानों पर रोक लगा दी है। एअर इंडिया की दिल्ली-तेल अवीव फ्लाइट को भी सुरक्षा कारणों से मुंबई डायवर्ट कर दिया गया।इससे पहले इस्राइल और अमेरिका ने ईरान के विभिन्न सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर संयुक्त हमले किए थे। तेहरान में शीर्ष नेतृत्व से जुड़े परिसरों के आसपास धमाके हुए। इस्राइली सेना ने दावा किया कि उसने पश्चिमी ईरान में ईरानी शासन से जुड़े कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बयान जारी किया
हमलों के बाद इस्राइल में भी सायरन बजने लगे और नागरिकों को शेल्टर हाउस में भेजा गया। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बयान जारी कर कहा कि यह अभियान ईरान से उत्पन्न “अस्तित्वगत खतरे” को खत्म करने के लिए शुरू किया गया है और अमेरिका के साथ मिलकर कार्रवाई जारी रहेगी।इधर, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी लाल सागर क्षेत्र में हमले फिर से शुरू करने की चेतावनी दी है। इससे वैश्विक शिपिंग रूट्स और तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई से पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता गहरा गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल जाएगा।








