समाधान के लिए संस्थागत सहयोग जरूरी है : डी वाई चंद्रचूड़

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नयी दिल्ली : प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि न्यायिक प्रश्नों पर निर्णय के दौरान समाधान के लिए संस्थागत सहयोग जरूरी है और यह न्याय तक पहुंच बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है। प्रधान न्यायाधीश ने यहां बार ‘काउंसिल ऑफ इंडिया’ (बीसीआई) के दो दिवसीय ‘अंतरराष्ट्रीय अधिवक्ता सम्मेलन 2023’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह सोचना काल्पनिक है कि ऐसा भी एक दिन आएगा, जब ‘‘हम सटीक समाधान तलाश पाएंगे और न्याय प्रदान करते वक्त कोई चुनौती नहीं होगी।’’

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘ प्रशासनिक स्तर पर भी भारतीय न्यायपालिका को विभिन्न देशों के साथ समन्वयनकारी होना चाहिए। भारत ने मॉरीशस और भूटान में सुप्रीम कोर्ट की इमारतों का निर्माण करा कर अहम भूमिका निभाई है।’’ उन्होंने कहा कि संविधानसभा द्वारा भारत के संविधान का निर्माण किया जाना दलगत भावना से ऊपर उठ कर जुड़ने का एक खास उदाहरण है।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘हम इस तरह के प्रयास देखते हैं और यह कुछ ऐसी चीज है जिस पर भारतीय नागरिक होने के नाते हमें गर्व होना चाहिए। यह हाल में संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के दौरान भी दिखा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मतभेदों पर जोर देने की हमारी प्रवृत्ति के बीच हम अक्सर न्याय के हित को आगे बढ़ाने के लिए संस्थानों के बीच सहयोग के ढेरों उदाहरणों को भूल जाते हैं…।

’’न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक बैठक में 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय लागत के साथ ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण को मंजूरी दी गई। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ई-कमेटी अलग-थलग हो कर नहीं बल्कि अन्य प्रकार के सरकारी संस्थानों के साथ निरंतर सहयोग से काम कर रही है।

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