IndiGo crisis: पायलटों ने लगाई गंभीर आरोपों की बौछार, मैनेजमेंट की मंशा पर सवाल

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IndiGo crisis:

नई दिल्ली, एजेंसियां। इंडिगो एयरलाइंस में जारी फ्लाइट संकट अब सातवें दिन में प्रवेश कर गया है और अलग-अलग एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट्स का संचालन अभी तक सामान्य नहीं हो पाया है। इस बीच एयरलाइन के पायलटों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह संकट जानबूझकर पैदा किया गया ताकि सरकार के द्वारा लागू किए गए बदले हुए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को वापस कराया जा सके। पायलटों का कहना है कि मैनेजमेंट ने नए सेफ्टी नियमों को लागू करने में जानबूझकर रुकावट डाली और इसके जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

पायलटों ने उठाये सवाल

पायलटों ने सवाल उठाया कि बदले हुए FDTL नियमों वाली एयरलाइन में सिर्फ 65 कैप्टन और 59 फर्स्ट ऑफिसर की कमी से हज़ारों फ्लाइट्स को कैंसल या देरी से चलाना संभव नहीं है। उनका आरोप है कि यह संकट सरकार पर दबाव डालने के लिए बनाया गया। एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट साग्निक बनर्जी ने कहा कि फ्लाइट्स की सुरक्षा खतरे में है और एयरलाइन मुनाफे को प्राथमिकता दे रही है, जबकि नियमों का पालन लंबे समय से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा था।

साग्निक बनर्जी के अनुसार

साग्निक बनर्जी के अनुसार, नियम लागू होने पर 4,581 पायलट्स उपलब्ध होने चाहिए थे, लेकिन केवल 124 पायलटों की और आवश्यकता थी। उन्होंने बताया कि आमतौर पर स्टाफ़ डिपार्चर से 8-10 घंटे पहले रिपोर्ट करता है, लेकिन हाल ही में उन्हें देर से बुलाया जाने लगा। इसके अलावा, एयरपोर्ट पर प्लेन पार्किंग दूरी में बदलाव ने क्रू के रिपोर्टिंग टाइम में देरी पैदा की। पायलट अब अधिक पारदर्शी सिस्टम की मांग कर रहे हैं, जिससे पिछले पांच दिनों में यह संकट उत्पन्न हुआ और उनके लिए यह सबसे अफ़रा-तफ़री भरे दिन साबित हुए हैं। इस संकट के बीच, DGCA ने एयरलाइन को 24 घंटे में जवाब देने का समय दिया है और यदि उत्तर नहीं मिला तो कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। पायलटों का कहना है कि वास्तविक समस्या केवल 5-7% फ्लाइट्स पर असर डालती है, लेकिन इसे व्यापक संकट के रूप में पेश किया जा रहा है।

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