नयी दिल्ली, एजेंसियां : प्रख्यात उर्दू कवि और गीतकार गुलजार ने कहा कि भारतीय सिनेमा शुरुआती ‘टॉकीज’ युग की जकड़न से मुक्त नहीं हुआ है और फिल्मों में अत्यधिक संवाद, गाने और झगड़ों की वही पुरानी घिसी-पिटी बातें दोहराई जा रही हैं।
बुधवार को साहित्य अकादमी के साहित्योत्सव के 39वें संस्करण में ‘संवत्सर व्याख्यान’ में, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित गुलजार ने कहा कि “ध्वनियाँ और शब्द भले ही बदल गए हों लेकिन कथा का सार वही है।”
‘माचिस’ फिल्म के निर्देशक ने गुलजार ने कहा ‘दुर्भाग्य से भारतीय सिनेमा अभी भी शुरुआती ‘टॉकीज़’ युग की जकड़न से मुक्त नहीं हो पाया है।
आलम आरा या हंटरवाली की तरह हम अभी भी अत्यधिक संवाद, गाने, झगड़े और न जाने क्या-क्या की वही पुरानी घिसी-पिटी बातें दोहरा रहे हैं।’
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