नयी दिल्ली: भारत 2032 तक कुल 13,800 मेगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता वाले 18 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर को जोड़ेगा।
इसके साथ ही परमाणु बिजली की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 22,480 मेगावाट हो जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले सप्ताह गुजरात के काकरापार में दो स्वदेश निर्मित 700 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा रिएक्टर समर्पित करने के बाद न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने इसकी घोषणा की थी।
एनपीसीआईएल फिलहाल 8,180 मेगावाट की कुल क्षमता वाले 24 रिएक्टर संचालित करता है। प्रधानमंत्री ने 22 फरवरी को काकरापार परमाणु ऊर्जा स्टेशन (केएपीएस-3 और 4) की इकाई तीन और चार को राष्ट्र को समर्पित किया।
प्रधानमंत्री मोदी की काकरापार यात्रा से दो दिन पहले 20 फरवरी को केएपीएस-4 को पश्चिमी पावर ग्रिड से जोड़ा गया था।
एनपीसीआईएल ने कहा कि केएपीएस तीन और चार (70 मेगावाट की दो इकाई) सबसे बड़े स्वदेशी दबावयुक्त भारी पानी रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा की भूमिका बढ़ने वाली है और यह गर्व की बात है कि भारत इस उन्नत तकनीक में आत्मनिर्भर है।
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