दिनांक – 22 जून 2024
दिन – शनिवार
विक्रम संवत – 2081
शक संवत -1946
अयन – उत्तरायण
ऋतु – वर्षा ॠतु
मास – ज्येष्ठ
पक्ष – शुक्ल
तिथि – पूनम सुबह 06:37 तक तत्पश्चात प्रतिपदा
नक्षत्र – मूल शाम 05:54 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढा
योग – शुक्ल शाम 04:45 तक तत्पश्चात ब्रह्म
राहुकाल – सुबह 09:19 से सुबह 11:00 तक
सूर्योदय-05:09
सूर्यास्त- 06:22
दिशाशूल – पूर्व दिशा में
व्रत पर्व विवरण – ज्येष्ठ पूर्णिमा,देव स्नान पूर्णिमा,प्रतिपदा क्षय तिथि
विशेष – पूर्णिमा व व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।
(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी।
जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।’ (ब्रह्म पुराण’)
शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय।’ का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण’)
हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण)
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