रांची। Health news : दुनिया में कब किस कौन सी बीमारी का शिकार होना पड़ जाए या कोई नहीं जानता। अभी हाल की रिपोर्ट से पता चल रहा है कि दुनियाभर में ब्रेन ट्यूमर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यदि समय रहते ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों को न समझा जाए तो यह खतरनाक साबित हो सकता है।
यह बीमारी बच्चों से लेकर वयस्कों तक सभी को प्रभावित कर सकती है। बहुत लोग ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों को सामान्य समझने की गलती कर बैठते हैं और यह मामला बढ़ जाता है। आइए जानते हैं, ब्रेन ट्यूमर क्यों और कैसे होता है, ब्रेन ट्यूमर से बचने के उपाय, इसके प्रकार इत्यादि।
ब्रेन ट्यूमर क्या है?
मस्तिष्क में होने वाली असामान्य कोशिकाओं के समूह को मस्तिष्क का ट्यूमर कहते हैं। ऐसी अवस्था में असामान्य कोशिकाएं मस्तिष्क के किसी भी लोब में हो सकती है। ब्रेन ट्यूमर कैंसर युक्त या कैंसर रहित दोनों तरह के हो सकते हैं।
कुछ ट्यूमर बहुत तेजी से बढ़ते हैं, तो कुछ ट्यूमर का विकास धीरे-धीरे होता है। जब ट्यूमर बढ़ता है तो स्कैल्प के भीतर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति आपके स्वास्थ्य और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाती है और घातक हो सकती है।
ब्रेन ट्यूमर और ब्रेन कैंसर को ऐसे समझें, ब्रेन ट्यूमर जब आपके मस्तिष्क से शुरू होता है और फैलता है, उसे प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर कहते हैं। यह जरूरी नहीं कि हर ब्रेन ट्यूमर, ब्रेन कैंसर होता है।
लेकिन जब कैंसर आपके शरीर के अन्य भाग से शुरू होता है और ब्रेन में फैलता है, उसे सेकेंडरी ब्रेन ट्यूमर या मेटास्टेटिक ब्रेन कैंसर कहते हैं।
ब्रेन ट्यूमर के प्रकार- कैंसर वाले ब्रेन ट्यूमरः
कैंसर वाले ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क के प्राइमरी ट्यूमर के रूप में जाने जाते हैं। यह ट्यूमर मस्तिष्क से शुरू होता है और धीरे-धीरे शरीर के अन्य भागों में फैलता है। इलाज के बाद भी इसके वापस होने की संभावना होती है।
बिना कैंसर वाले ब्रेन ट्यूमरः
इस तरह के ट्यूमर का विकास धीरे-धीरे होता है। बिना कैंसर वाले ट्यूमर का इलाज होने के बाद इसके दोबारा होने की संभावना बहुत कम होती है।
ब्रेन ट्यूमर के लक्षणः
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण और संकेत उसके स्थान, आकार और बढ़ने की दर पर निर्भर करता है। कई बार बिना लक्षण के भी यह हो सकता है।
ब्रेन ट्यूमर के सामान्य लक्षण और संकेतः
सिर में बार-बार दर्द होना, सिरदर्द का धीरे-धीरे बढ़ना, धुंधली दृष्टि, सीजर्स, दूर दृष्टि कमजोर होना, शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस, नींद में कमी, दैनिक गतिविधियों में बदलाव होना, सुस्ती व थकान, सोचने-समझने की क्षमता में कमी, मतली और उल्टी होना और व्यक्तित्व में परिवर्तन।
रेडिएशन के दुष्प्रभावः
किसी व्यक्ति के लिए आयोनाइजिंग रेडिएशन के संपर्क में आना ब्रेन ट्यूमर के खतरे को बढ़ा सकता है। कैंसर थेरेपी के दौरान आप इस रेडिएशन के संपर्क में आ सकते हैं। यह ब्रेन ट्यूमर के खतरे को बढ़ा सकता है।
परिवार में यदि किसी अन्य व्यक्ति को पहले से ब्रेन ट्यूमर है, तो दूसरे व्यक्ति में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है। एचआईवी/ एड्स – यदि आपको एचआईवी–एड्स है, तो सामान्य लोगों की तुलना में ब्रेन ट्यूमर की संभावना आपमें अधिक है।
पहले से कैंसर का होनाः
कैंसर से ग्रस्त बच्चों में बाद के जीवनकाल में ब्रेन ट्यूमर होने की संभावना ज्यादा होती है। साथ ही ल्यूकेमिया वाले वयस्कों में भी इसके होने की संभावना ज्यादा होती है।
ब्रेन ट्यूमर का इलाज क्या हैः
क्या ब्रेन ट्यूमर का इलाज संभव है ? यदि समय से पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है, लेकिन यह अलग-अलग कारकों पर निर्भर करता है। जैसे -ट्यूमर का प्रकार क्या है, यह मस्तिष्क में किस स्थान पर है, ट्यूमर का आकार, साइज और कोशिकाएं कितनी असामान्य है, इत्यादि।
ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए यह डॉक्टर तय करते हैं, कि कौन-सा उपचार आपके लिए सही है। ब्रेन ट्यूमर से बचने के उपाय या उपचार के विकल्प इस प्रकार हैं।
रेडिएशन थेरेपीः
रेडिएशनथेरेपी में ट्यूमर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए हाई एनर्जी का प्रयोग किया जाता है। यह थेरेपी आपको शरीर के बाहर से दी जा सकती है। कुछ असामान्य मामलों में यह थेरेपी शरीर के अंदर आपके ट्यूमर के पास रखी जा सकती है।
सर्जरीः
यदि ब्रेन में ट्यूमर कुछ ऐसे स्थान पर है, जहां से उसे हटाना आसान हो तो ऑपरेशन के जरिए सर्जन उसे ज्यादा से ज्यादा हटाने की कोशिश करते हैं। इसके कुछ हिस्से को भी हटाने से लक्षण को कम किया जा सकता है।
कीमो थेरेपीः
कीमोथेरेपी में ट्यूमर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए, दवाओं को गोली के रूप में या ब्लड वेसल्स में इंजेक्शन के माध्यम से दिया जा सकता है। इसमें कई तरह की दवाएं उपलब्ध होती है, जो कैंसर के साइज और प्रकार के आधार पर दी जाती है।
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