नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के छह बागी विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंच गये हैं। कोर्ट में उन्होंने हिमाचल प्रदेश विधानसभा के स्पीकर के फैसले को चुनौती दी है।
बता दें कि पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कटौती प्रस्ताव और वित्त विधेयक पर मतदान से अनुपस्थित रहने पर स्पीकर ने 6 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था।
सभी बागी विधायकों ने राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग भी की थी, जिससे कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी की करारी हार हुई।
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के बागी विधायक राजेंद्र राणा ने शनिवार को दावा किया था कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कार्यशैली से घुटन महसूस कर रहे पार्टी के नौ और विधायक उनके संपर्क में हैं।
उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने वाले कांग्रेस के छह, और तीन निर्दलीय विधायकों के अलावा पार्टी के नौ और विधायक हमारे संपर्क में हैं।
हिमाचल से राज्यसभा के लिए हुए एकमात्र सीट पर चुनाव में भाजपा ने 25 विधायकों के साथ अल्पमत में रहने के बावजूद जीत दर्ज की।
कांग्रेस और बीजेपी के उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले थे। बाद में पर्ची के आधार पर जीत का फैसला किया गया।
राज्यसभा चुनावों में हुई ‘क्रॉस-वोटिंग’ का बचाव करते हुए राणा ने कहा कि हम विधानसभा चुनावों में जीत हासिल कर चुकीं आशा कुमारी, रामलाल ठाकुर और कौल सिंह जैसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी कर एक बाहरी व्यक्ति अभिषेक मनु सिंघवी को टिकट दिये जाने से नाराज हैं।
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