High Court:
मुंबई, एजेंसियां। बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक व्यक्ति के खिलाफ जारी किया गया निरोधक आदेश रद्द कर दिया। इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा गया कि आदेश के अक्षर धुंधले थे, क्योंकि प्रिंटिंग सही से नहीं हुई थी। कोर्ट ने यह पाया कि व्यक्ति के खिलाफ जारी किया गया निरोधक आदेश अमान्य था, क्योंकि हिरासत के आधार अवैध थे, जिससे उसे अपनी हिरासत के कारणों को समझने और चुनौती देने का कानूनी अधिकार समाप्त हो गया था।
अभिजीत चक्रधर परहद, जिन्हें बबलू के नाम से भी जाना जाता है, को पुणे के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर हिरासत में लिया गया था। परहद पर 2021 में हत्या और 2024 में जबरन वसूली सहित गंभीर आपराधिक आरोप थे और उसका आपराधिक इतिहास भी था। उसे पुणे के येरवड़ा केंद्रीय कारागार में हिरासत में रखा गया था।
High Court: अपराधी के पिता ने दी आदेश को चुनौती
अधिकारियों ने उसे महाराष्ट्र प्रतिवादक, माफिया, नशे के व्यापारियों और खतरनाक व्यक्तियों की गतिविधियों (एमपीडीए) के तहत ‘खतरनाक व्यक्ति’ माना, जिसके कारण उनका निरोध हुआ। परहद के पिता ने निरोधक आदेश को चुनौती दी और आरोप लगाया कि उनके बेटे को दिए गए निरोधक आदेश के आधार अस्पष्ट और मुख्यतः न पढ़े जा सकने योग्य थे।
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