कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मंत्रियों और विधायकों का वेतन बढ़ेगा। लोकसभा चुनाव की घोषणा से ऐन पहले राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इसे मंजूरी दे दी है। बढ़ी हुई सैलरी का फैसला अप्रैल महीने से प्रभावी होगा।
शनिवार की सुबह राजभवन से एक्स हैंडल से पोस्ट किया गया कि राज्यपाल ने दोनों विधेयकों पर अपनी सहमति दे दी है।
बताते चलें कि पिछले साल 7 सितंबर को विधानसभा के मानसून सत्र में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सभी मंत्रियों, राज्य के मंत्रियों और विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी की घोषणा की थी।
उन्होंने यह भी कहा था कि वह अपनी सैलरी नहीं बढ़ा रही हैं। ममता ने कहा था कि हमारे राज्य के विधायकों का वेतन देश में सबसे कम है।
इसलिए हमारी सरकार ने विधायकों का वेतन बढ़ाने का फैसला किया है। अपनी सैलरी के बारे ममता ने कहा था कि पूर्व सांसद के तौर पर मुझे 1 लाख रुपये पेंशन मिलती है। इसके अलावा विधायक के तौर पर मुझे वेतन मिलता है। लेकिन मैं इसे नहीं लेती हूं।
विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी तीन स्तरों पर की गई है। विधायकों का वेतन 10,000 रुपये प्रति माह था। यह बढ़कर 50 हजार रुपये हो गया।
राज्य के मंत्रियों को 10 हजार 900 रुपये महीना मिलता था। अब से उन्हें 50 हजार 900 रुपये मिलेंगे। इसके अलावा राज्य में पूर्व मंत्रियों का वेतन 11 हजार रुपये था उन्हें इस बार से 51 हजार रुपये वेतन के तौर पर मिलेंगे।
सरकार की वेतन संरचना के अनुसार, विधायकों को भत्ते और समिति की बैठकों में भाग लेने के लिए अब तक कुल 81,000 रुपये मिलते थे। अब उन्हें कुल 1 लाख 21 हजार रुपये मिलेंगे।
विपक्षी दलों के नेताओं और राज्य के मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों को इतने दिनों के लिए कुल मिलाकर 1 लाख 10 हजार रुपये मिलते थे। इस बार से उन्हें करीब डेढ़ लाख रुपये मिलेंगे।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा सत्र में कहा था कि वे अपना वेतन नहीं बढ़ायेंगी।
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