नई दिल्ली। युवतियों में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) की बीमारी होना आज आम बात हो गई है। देश में हर 5 में से 1 युवा लड़की पीसीओएस की चपेट में है।
गांवों के मुकाबले शहरों में रह रही लड़कियों को PCOS का खतरा ज्यादा होता है। इसके पीछे की वजह रेस्टोरेंट और कैफे का खाना, सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैकेज्ड फूड, अधूरी नींद, स्ट्रेस और न के बराबर एक्सरसाइज शामिल हैं।
आज हम बतायेंगे कि पीसीओएस क्या है, ये किन वजहों से होता है। इसके होने पर कैसे लक्षण दिखाई देते हैं और इसे ठीक करने का क्या तरीका है।
डाक्टरों के अनुसार पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome) महिलाओं में होने वाला हार्मोन इम्बैलेंस है।
कुछ लड़कियों की ओवरी में एंड्रोजेनेस यानी पुरुष हार्मोन का प्रोडक्शन ज्यादा होने लगता है। इससे ओव्यूलेशन नियमित रूप से ही हो पाता।
हार्मोन इम्बैलेंस होने पर ओवरी में छोटी-बड़ी आकार की सिस्ट यानी गांठें बन जाती हैं। धीरे-धीरे सिस्ट का आकार बड़ा होने लगता है।
इससे महिलाओं में फर्टिलिटी और इर्रेगुलर पीरियड की दिक्कतें होने लगती हैं। पीसीओएस का सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो इसके कई साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
ऐसे में जरूरी है कि शरीर में पीसीओएस के लक्षण दिखने पर इग्नोर नहीं करना चाहिए। शुरुआत में बीमारी को क्योर करना आसान होता है।
पीसीओएस के लक्षणः
• चेहरे पर मुंहासे
• फेशियल और बॉडी हेयर ग्रोथ
• डिप्रेशन
• दिल की बीमारी
• बांझपन
• डायबिटीज
• हाइपरटेंशन
कारणः
पीसीओएस के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, गलत खानपान, बैठे रहने की आदत, आलस और बीमारी का संकेत देते लक्षणों को नजरअंदाज करने से पीसीओएस का खतरा कहीं ज्यादा बढ़ जाता है।
आज मोबाइल और गैजेट्स ने माहौल ही बदल दिया है। जिसकी वजह से शारीरिक गतिविधि नहीं हो पाती है।
अधिकांश समय लड़कियां कंप्यूटर के सामने बैठकर ही बिता देती हैं। फिजिकल एक्टिविटीज के लिए समय नहीं निकालती हैं।
इसके साथ रात में देर तक सोशल मीडिया पर बिजी रहने से नींद पूरी न होना, डिहाईड्रेशन, वजन बढ़ना, हाइपरप्रोटीनेमिया, थायराइड की समस्या और मूड स्विंग हो रहा है। इसके लिए पूरी तरह से बदलती लाइफस्टाइल जिम्मेदार है।
ये होती हैं परेशानियाः
महिलाओं को गर्भधारण करने में दिक्कत आती है। इससे पीड़ित 70 से 80 प्रतिशत महिलाएं इनफर्टिलिटी से प्रभावित हैं।
महिलाएं हॉर्मोनल इंबैलंस के कारण भावनात्मक रूप से उथल-पुथल का सामना करती हैं।
शरीर का वजन तेजी से बढ़ने लगता है। वजन बढ़ने से कई तरह की बीमारियों होने का रिस्क बढ़ जाता है।
पीरियड्स समय से नहीं होते हैं। पीरियड्स के दौरान किसी को कम तो किसी को ज्यादा ब्लीडिंग होने की परेशानी होने लगती है।
पीसीओएस यूट्रस की एंडोमेट्रियल लाइनिंग पर असर करता है। ऐसे में पीसीओएस की परेशानी होने पर एंडोमेट्रियल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
पीसीओएस की परेशानी हॉर्मोन्स से संबंधित है। इसलिए लाइफस्टाइल को मैनेज करना बहुत जरूरी है। ताकि हॉर्मोन्स का सीक्रेशन सही तरीके से हो सके।
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