नई दिल्ली। क्रिकेटर से पॉलिटिशियन बने भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने पॉलिटिक्स को टाटा, बाय-बाय कर दिया है।
अब वह लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे। पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद गौतम गंभीर इस बार का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।
उन्होंने टिकट वितरण के लिए बन रही लिस्ट से पहले ही अपना नाम वापस ले लिया है। यही नहीं, गंभीर अब राजनीति करते भी नहीं दिखाई देंगे। ऐसे भी उनका नाम कटना तय माना जा रहा था।
शनिवार की सुबह उनके एक ट्वीट ने पूरी तस्वीर साफ कर दी है। गंभीर ने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से उन्हें राजनीतिक दायित्वों से मुक्त करने की सिफारिश की है।
इसका मतलब है कि उन्होंने राजनीति से भी सन्यास लेने का फैसला कर लिया है। बता दें कि भारतीय जनता पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की लिस्ट फाइनल कर रही है।
चर्चा थी कि इस बार पूर्वी दिल्ली से बीजेपी गौतम गंभीर का टिकट काट सकती है। लिस्ट आने से पहले ही गौतम गंभीर ने अपना नाम वापस ले लिया है।
गौतम गंभीर ने अपने ट्वीट में लिखा कि मैंने पार्टी के आदरणीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा जी से विनती की है कि वे मुझे राजनीतिक दायित्वों से मुक्त करें, ताकि मैं आने वाली क्रिकेट प्रतिबद्धताओं पर ध्यान दे सकूं।
मैं अपनी सेवा का अवसर देने के लिए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी का हार्दिक धन्यवाद करता हूं। जय हिंद!
बताते चलें कि गौतम गंभीर को पूर्वी दिल्ली सीट से इस बार टिकट मिलने पर संशय था। कई दिनों से कहा जा रहा था कि बीजेपी इस बार के लोकसभा चुनाव में उन्हें दोबारा रिपीट करने के मूड में नहीं थी।
बीजेपी दिल्ली से कोई नई लिस्ट जारी करती, उससे पहले ही गंभीर ने अपना नाम वापस ले लिया। इस बार कहा जा रहा है कि शायद 100 से ज्यादा सांसदों का टिकट बीजेपी काट सकती है।
हालांकि गौतम गंभीर अपनी समाज सेवा और गरीबों के लिए किये जा रहे कार्यों को जारी रखेंगे। बताते चलें कि गौतम गंभीर अपने संसदीय क्षेत्र में प्रतिदिन सुबह और शाम सैकड़ों गरीबों को मुफ्त भोजन कराते हैं।
इस पर प्रतिमाह वह लाखो रुपये खर्च करते हैं। इसके अलावा बीसीसीआइ के कमेट्री टीम में शामिल हैं। साथ ही आइपीएल में कई टीमों के कोच की भूमिका भी निभाते रहे हैं।
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