फिल्म रिव्यू- जीरो से रीस्टार्ट [Film Review- Restart from Zero]

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सीट से उठना मुश्किल

मुंबई, एजेंसियां। 27 अक्टूबर 2023 को फिल्म 12th फेल रिलीज हुई थी। अब एक साल बाद इसकी मेकिंग से जुड़ी फिल्म रिलीज की गई है। फिल्म का नाम है- जीरो से रीस्टार्ट। फिल्म की टोटल लेंथ 90 मिनट है। समीक्षकों ने इसे 5 में से 4.5 स्टार रेटिंग दी है।

यहां कहानी कैसी है, उस पर बात नहीं है। बल्कि कहानी बुनी कैसे गई। एक्टर्स को कास्ट कैसे किया गया। लोकेशन कैसे फाइनल हुए, इन सब बिंदुओं पर बात की गई है।

फिल्म की शुरुआत में बताया गया कि विधु विनोद चोपड़ा दो साल से 12th फेल की कहानी पर काम कर थे। उनके ऑफिस में स्क्रिप्ट का बंडल पड़ा हुआ था। वे बस फिल्म की कहानी और कॉन्सेप्ट पर काम कर रहे थे। किसी डायरेक्टर की खोज में थे। दो तीन डायरेक्टर आए भी। सभी को फिल्म की कहानी बकवास लगी।

फिर किसी शख्स ने विधु विनोद चोपड़ा से कहा कि 12th फेल तो हर व्यक्ति की कहानी है, इसमें आप नया क्या लेकर आएंगे? विधु को इसी बात ने एक किक दे दिया।

उन्होंने कहा कि यही तो खास बात है कि यह फिल्म हर व्यक्ति की कहानी है, इससे ज्यादातर लोग कनेक्ट कर पाएंगे। फिर इसी तरह विधु खुद फिल्म के डायरेक्टर बन गए।

खुद को डाइरेक्टर चुनाः

विधु ने खुद को फिल्म के डायरेक्टर के तौर पर चुन लिया, लेकिन तलाश IPS मनोज शर्मा के रोल के लिए किसी एक्टर की थी। विधु को वरुण धवन को कास्ट करने की सलाह मिली।

उन्होंने माना कि वरुण धवन भले टैलेंटेड एक्टर हैं, लेकिन एक गांव के लड़के के किरदार में फिट नहीं बैठेंगे। फिर उन्होंने विक्रांत मैसी को कास्ट किया। आगे क्या हुआ, बताने की जरूरत नहीं है।

इन फिल्मों का निर्माण किया विधु विनोद चोपड़ा नेः

विधु विनोद चोपड़ा (कैप में) ने मुन्नाभाई MBBS, 3 इडियट्स और पीके जैसी फिल्मों का निर्माण किया है। इसके अलावा उन्होंने एकलव्य, शिकारा और परिंदा जैसी फिल्मों का डायरेक्शन भी किया है।

90 मिनट की है फिल्मः

यह 90 मिनट की फिल्म उन लोगों के लिए एक ट्यूटोरियल हो सकती है, जो फिल्म मेकिंग में अपना करियर बनाना चाहते हैं। विधु विनोद चोपड़ा क्राफ्ट और सिचुएशन को कितना बखूबी समझते हैं, यह फिल्म देखने के बाद समझ आ जाएगा।

अंदाजा नहीं था कि 12th फेल कभी बन भी पाएगीः

विधु ने खुद कहा कि वे नहीं जानते कि 12th फेल कभी बन भी पाएगी कि नहीं। कई बार उन्हें जीरो से रीस्टार्ट करना पड़ा। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। परिणाम सबसे सामने है।
अंत में सबसे बड़ा सवाल, अब मूवी की मेकिंग से जुड़ी फिल्म देखने कोई क्यों जाए?

खैर यह सवाल स्वाभाविक भी है। हालांकि, एक बात कहना चाहूंगा कि अगर आपने 12th फेल देखी है और उसे पसंद किया है, तो इस फिल्म को आप बिना आंख झपकाए देख सकते हैं।

फिल्म कैसे बनी, क्या-क्या चुनौतियां आईं। कितना समय लगा। हर सीन की डिटेलिंग कैसे की गई। ओरिजिनल लोकेशन पर शूट में दिक्कतें कितनी हुईं। यह सारी बातें इस फिल्म में अच्छे से बताई गई हैं।

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