फिल्म रिव्यू: आर्टिकल-370

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रांची। शुक्रवार 23 फरवरी को यामी गौतम स्टारर आर्टिकल 370। रिलीज हुई है। सच्ची घटना पर आधारित फिल्म आर्टिकल 370 की लंबाई 2 घंटे 40 मिनट है। समीक्षकों ने फिल्म को 5 में से 3 स्टार रेटिंग दी है।
मूवी रिव्यू, आर्टिकल- 370
लेंथ-2 घंटे 40 मिनट
रेटिंग- 3 स्टार
जॉनर- रियल लाइफ ड्रामा
स्टारकास्ट- यामी गौतम, प्रियामणि, अरुण गोविल, वैभव तत्ववादी और किरण करमाकर

फिल्म की कहानी:

आर्टिकल 370 हटाने के पीछे की स्ट्रैटजी क्या थी, इतने बड़े फैसले के पीछे कौन-कौन लोग थे। उस वक्त का घटनाक्रम क्या था।

फिल्म की कहानी यही बताती है। कश्मीर में हालात खराब हो रहे थे, ऐसे में सरकार को ध्यान देना था कि वहां खून भी न गिरे और इस काले प्रावधान को हटा भी दिया जाए।

इसकी पहली आधारशिला तब रखी गई, जब 2016 में आतंकी बुरहान वानी का एनकाउंटर हुआ। बुरहान का एनकाउंटर करने वाली ऑफिसर जूनी हकसर (यामी गौतम) को अनुशासन भंग करने का आरोप लगाकर कश्मीर से हटा कर दिल्ली भेज दिया जाता है।

इसके बाद PM0 की एक अधिकारी राजेश्वरी स्वामीनाथन (प्रियामणि) के कहने पर जूनी को NIA का एजेंट बनाकर दोबारा कश्मीर भेजा जाता है।

जूनी को जिम्मेदारी दी जाती है कि वो वहां के राजनेताओं, अलगाववादियों और उपद्रवियों से निपटकर हालात नॉर्मल करे। इधर दिल्ली में आर्टिकल 370 को हटाने के लिए हर नियम और कानूनी दांवपेच लगाए जाते हैं।

अभिनय:

यामी गैौतम एकदम जमी हुई है। लगता है जैसे वह ऐसी फिल्मों के लिए ही बनी हैं। उरी- द सर्जिकल स्ट्राइक के बाद एक बार फिर से उन्होंने शानदार काम किया है।

यामी ने पूरी फिल्म को अपने कंधों पर संभाला है। PM0 में सेक्रेटरी बनीं प्रियामणि ने संजीदगी से अपना रोल निभाया है। उन्हें जैसा रोल दिया गया है, वो उसमें सटीक बैठती हैं।

गृह मंत्री अमित शाह का रोल निभा रहे एक्टर किरण करमाकर इस फिल्म के चौंकानेवाले फैक्टर हैं। उन्होंने अमित शाह के बॉडी लैंग्वेज को शानदार तरीके से निभाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका में अरुण गोविल थोड़े हल्के लगे हैं। आर्मी ऑफिसर के रोल में वैभव तत्ववादी ने प्रभावित किया है।

निर्देशन:

आदित्य सुहास जामभले फिल्म के निदेशक हैं। डायरेक्शन में काफी सारी खामियां हैं। यह फिल्म डॉक्यूमेंट्री ज्यादा लगती है।

वैसे तो फिल्म की लेंथ 2 घंटे 40 मिनट है, फिर भी ऐसा लगता है कि तथ्यों को जल्दी-जल्दी समेटने की कोशिश की गई है। हालांकि, कई-कई जगह डायरेक्टर इंटरेस्ट बनाने में कामयाब हुए हैं।

संगीत:

फिल्म में एक ही गाना है, जो कि बैकग्राउंड में बजता है। यह भी इतना प्रभावशाली नहीं है। फिल्म देखने के बाद इसका म्यूजिक या बैकग्राउंड स्कोर याद भी नहीं रहता।

फिल्म देखें या नहीं:

अगर आपको पता नहीं है कि आर्टिकल 370 हटाने के पीछे स्ट्रैटजी क्या थी, तो अपना नॉलेज बढ़ाने के लिए फिल्म को देख सकते हैं।

हालांकि तथ्यों को बहुत सिनेमाई अंदाज में पेश किया गया है, जो कि खटकता है। इतने बड़े मुद्दे को हल्के अंदाज में दिखा दिया गया है, हालांकि इसके बावजूद फिल्म एक बार देखी जा सकती है।

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