जाति-धर्म और भाषा पर नहीं मांग सकते वोट-चुनाव आयोग

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धर्मस्थलों पर चुनाव प्रचार नहीं कर सकते

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों को स्पष्ट कर दिया है कि धर्म और जात-पात के नाम पर वोट नहीं मांग सकते।

इतना ही नहीं, आयोग ने धार्मिक स्थलों पर चुनाव प्रचार भी बैन कर दिया है। आयोग ने शनिवार को एक एडवाइजरी जारी की है।

इसमें कहा गया है कि राजनीतिक दल जाति-धर्म और भाषा के आधार पर वोट मांगने से बचें।

कहा है कि एडवाइजरी की शर्तों को नहीं मानने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। आयोग ने ऐसे समय में एडवाइडरी जारी की है, जब देश में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं।

साथ ही आयोग ने कहा है कि धार्मिक स्थलों जैसे मंदिर-मस्जिद, गुरुद्वारा औऱ गिरजाघरों का इस्तेमाल वोट मांगने के लिए नहीं किया जा सकता।

न ही धार्मिक स्थलों से चुनाव प्रचार किया जायेगा। आयोग ने उम्मीदवारों से भी कहा है कि वे वोट पाने के लिए अनुचित बयानबाजी से भी बचें।

बुजुर्गों के लिए अच्छी खबर

लोकसभा चुनाव में इस बार आपको बुजुर्ग वोटरों की लंबी कतार दिख सकती है। इसका कारण ये है कि निर्वाचन आयोग ने बुजुर्ग मतदाताओं के लिए नियम में बदलाव किये हैं।

इसके मुताबिक अब पोस्टल बैलेट के जरिये वोटिंग की आयु सीमा को बढ़ा दिया गया है। बता दें कि पहले ये आयु सीमा 80 साल थी, जिसे अब 85 साल कर दिया गया है।

दूसरे शब्दों में अब 85 साल होने पर ही बुजुर्ग वोटर पोस्टल बैलेट की सुविधा ले सकेंगे। नियम में इस बदलाव से पहले चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के बीच लंबी मंत्रणा हुई। इसके बाद चुनाव संचालन नियम (1961) में संशोधन किया गया है।

11 चुनावों के अध्ययन के बाद बदलाव

नियम में संशोधन से पहले पिछले 11 विधानसभा चुनावों के रुझान का अध्य़यन किया गया।

अध्ययन में ये तथ्य निकलकर सामने आया कि चुनावों में 80 साल से ऊपर के 97% बुजुर्ग वोटरों ने पोस्टल बैलेट के जरिए मतदान के बदले पोलिंग बूथ पर जाकर वोट डालना पसंद किया था।

इसे देखते हुए ही सरकार ने 2020 में किए गए इस प्रावधान में बदलाव किया है।

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