पत्रकारिता के लिए अपूरणीय क्षति है डॉ शैलेश शर्मा का जाना

10 Min Read

हजारीबाग के जाने-माने पत्रकार डॉ शैलेश शर्मा का जाना पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे हजारीबाग पत्रकारिता के एक सशक्त हस्ताक्षर थे । वे चार दशकों तक हजारीबाग के पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे थे। जैसे ही यह खबर मुझ तक पहुंची, मन-मस्तिष्क को विश्वास ही नहीं हो पा रहा है कि शैलेश शर्मा का निधन हो चुका है। अभी कुछ  दिन पहले ही उनसे मुलाकात हुई थी।

वे  बिल्कुल स्वस्थ दिख रहे थे। ‌उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी गड़बड़ी की कोई बात भी नहीं बताई थी। बल्कि जिस तरह वे मुस्कुराकर से मिलते थे, उसी  तरह मुस्कुराकर मिले थे। वे पान खाने के बड़े शौकीन थे। उस दिन भी वे  पान खाए हुए थे।‌ जो भी उनके जान-पहचान के लोग  शैलेश शर्मा के निधन समाचार सुन रहे हैं। किसी को भी विश्वास ही नहीं हो रहा है।  बिनोमा भावे विश्वविद्यालय से सेवा निवृत्ति के बाद शैलेश शर्मा  घर में नहीं बैठ गए थे। बल्कि पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी सक्रियता बरकरार थी।

वे बराबर अपने मित्रों से मिला करते थे। उनके मित्रों की एक लंबी सूची है। मृत्यु से कुछ दिन पूर्व ही उन्हें अपने शरीर में दर्द का अनुभव हुआ था। वे इलाज के लिए अपने बेटे के पास दिल्ली चले गए थे। जहां उन्हें मेदांता हॉस्पिटल में जांच के उपरांत कैंसर बताया गया था। वे कुछ दिनों तक मेदांता में ही इलाज रत रहे थे।  अचानक 18 तारीख की अहले सुबह 3:30 बजे उनका मात्र 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 

वे अपने पीछे पत्नी एक बेटा और एक बेटी सहित एक पोता छोड़ गए।  बेटा दिल्ली में ही एक निजी कंपनी में कार्यरत है।‌ उन्होंने अपने दोनों बच्चों की शादी बहुत ही धूमधाम से किया था । उन्होंने अपनी बेटी की शादी हजारीबाग के लोकप्रिय आई सर्जन डॉक्टर ललित जैन के बेटे से किया था। उनका अंतिम दाह संस्कार दिल्ली में ही संपन्न हुआ।

 सेवानिवृत्ति के बाद वे रोजाना कुम्हारटोली स्थित अपने आवाज से निकलकर मित्रों से मिलना नहीं भूले थे। वे  एक विनोदी स्वभाव के व्यक्ति थे। मित्रों से मिलकर हंसी-मजाक करना उनके दैनिक दिनचर्या में शामिल था। उनके इस तरह अकस्मात निधन पर किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा है कि शर्मा जी अब हम लोग के बीच नहीं रहे।  उन्होंने अपने करियर की शुरुआत महाविद्यालय के एक प्राध्यापक से किया था, लेकिन पत्रकारिता के प्रति उनकी अभिरुचि ने उन्हें एक वरिष्ठ पत्रकार के रूप में निर्मित कर दिया था।

 शैलेश शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर नगर में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा मुज़फ़्फ़रनगर से ही प्राप्त किया था।  आगे  उन्होंने  उत्तर प्रदेश के मेरठ विश्वविद्यालय से वाणिज्य विषय में  स्नातकोत्तर करने के बाद पीएचडी  भी किया था। उनका बचपन से ही शिक्षक बनने का मन था ।

इसी निमित्त उन्होंने इतनी उच्च शिक्षा हासिल की थी । शैलेश शर्मा छात्र जीवन से ही एक मेधावी छात्र रहे थे। शैलेश शर्मा की जन्मभूमि मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश जरूर रही है थी,  लेकिन उनकी कर्मभूमि  हजारीबाग ही रही थी । उन्होंने एक अध्यापक के रूप में हजारीबाग के मार्खम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से अपनी शुरुआत की थी। वे  वाणिज्य विषय के अच्छे जानकार थे। उनकी पढ़ाई की दक्षता बहुत जल्द ही प्रचारित हो गई थी ।

कॉलेज में छात्र-छात्राएं उनकी पढ़ाई से काफी प्रभावित हुए थे। आगे चलकर कई महाविद्यालयों से होते हुए विनोबा भावे विश्वविद्यालय, वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर बन गए थे । उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से सेवा निवृत्ति भी पाई थी।  वे यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच  एक लोकप्रिय शिक्षक के रूप में अपनी पहचान बनाने  में सफल हुए थे ।‌

वे  प्रारंभ से ही कम बोलने वाले व्यक्ति थे।  सहज, सरल उनके व्यक्तित्व की पहचान बन गई थी । उन्होंने कभी भी एक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर का घमंड नहीं किया । वे यूनिवर्सिटी के छात्रों से बहुत ही खुलकर मिला करते थे। जो भी छात्र-छात्राएं उनसे कोर्स संबंधी जानकारी चाहते थे।  वे बहुत ही सहजता के साथ बता दिया करते थे। अपने इसी व्यवहार के चलते वे विनोबा भावे विश्वविद्यालय के सीनेट के सदस्य बन पाए थे।  बाद में  वे अकादमी परिषद के सदस्य भी बने थे।  आगे चलकर प्रशिक्षण एवं नियोजन अधिकारी भी बने थे। वे  एनसीसी  कमीशंड ऑफिसर के रूप में भी काफी सफल रहे थे। वे महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के जिन पदों पर भी रहे थे ,उन  पदों की गरिमा को पूरी निष्ठा के साथ निभाया था।

महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की सेवा करते हुए उन्होंने पत्रकारिता को भी अपने कर्म का हिस्सा बनाया था।  वे एक ओर महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के रूप में सफल रहे थे।  वहीं दूसरी ओर एक पत्रकार के रूप में भी अपनी पहचान बनाने में भी काफी सफल रहे थे । लोगों का और मेरा भी मानना है कि वे एक पत्रकार के रूप में ज्यादा लोकप्रिय हो पाए थे।

उन्होंने एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में लिखना प्रारंभ किया था।  वे आगे चलकर  1987 के आसपास प्रभात खबर जैसे लोकप्रिय अखबार से जुड़े थे। हजारीबाग में प्रभात खबर को स्थापित करने में उनके अवदान को कभी विश्वजीत नहीं किया जा सकता है। वे  1995 में डाल्टेनगंज से प्रकाशित  राष्ट्रीय नवीन मेल के चीफ ब्यूरो के रूप में शानदार पत्रकारिता की पारी खेली थे ।

वे 2000 से 2010 तक दैनिक हिंदुस्तान के चीफ ब्यूरो रहे थे । आगे चलकर 2010 से 2015 तक दैनिक जागरण  के चीफ ब्यूरो की हैसियत से काम किया था। वे जिन भी अखबारों से जुड़े अखबारों का सर्कुलेशन बढ़ाने में बहुत हद तक कामयाब रहे थे। आज भी इन अखबारों के संपादक शैलेश शर्मा के गुणों का बखान करते नहीं थकते हैं।

सेवा निवृत्ति से पूर्व ही वे हिंदुस्तान टाइम्स तथा पायनियर अंग्रेजी अखबार में एक वरिष्ठ पत्रकार के रूप में अपनी सेवा दे रहे थे। वे इन दोनों अखबारों में लगातार लिखते रहे थे। वे जिन भी अखबारों से जुड़े रहे थे, हजारीबाग की विभिन्न बुनियादी समस्याओं पर लगातार लिखते रहे थे।

उनके लंबे पत्रकारिता के जीवन में कई चुनौतियां आई थीं। उन्होंने बड़े धैर्य और हिम्मत के साथ उन चुनौतियों का मुकाबला  किया था। वे अखबार में जिन सरकारी विभागों की अक्रमन्यता के  खिलाफ पर सवाल उठाया करते थे । उन विभागों के अधिकारी इनकी पत्रकारिता की कार्य शैली से सुधारने को दिवस हो जाया करते थे।

कुछ मामले में एक दो अधिकारियों ने उन्हें डराने व धमकाने का भी कोशिश किया था । लेकिन ये कभी डरे नहीं बल्कि एक निर्भीक और  निष्पक्ष पत्रकार के रूप में लगातार अक्रमन्यता के खिलाफ लिखते रहे थे। पिछले दिनों 27 नवंबर को  ही उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें ‘त्रिवेणी कांत ठाकुर पत्रकारिता सम्मान’ से अलंकृत किया गया था।

शैलेश शर्मा को महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में बेहतर शिक्षा देने के लिए कई संस्थाओं ने सम्मानित किया था। विश्वविद्यालय की सेवा के दौरान उन्होंने वाणिज्य विषय पर तीन पुस्तक भी लिखीं  थीं। ‘रूरल इकोनॉमिक्स, ‘सीसीएमआर’ और ‘प्रिंसिपल आफ इकोनॉमिक्स’ के नाम से ये तीन पुस्तक प्रकाशित हुईं।

वहीं दूसरी ओर एक स्वतंत्र लेखक के रूप में विभिन्न समाचार पत्रों में साहित्यिक, आर्थिक एवं सामाजिक विषयों पर शोधपूर्ण आलेख लिखा करते थे।  उन्होंने जो आलेख एक लेखक के रूप में विभिन्न समाचार पत्रों में लिखे थे।‌ वे इन आलेखों की भी पुस्तक प्रकाशित करना चाहते थे। 

लेकिन  विश्वविद्यालय की सेवा और पत्रकारिता के  लगातार भाग दौड़ के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे थे । वे महाविद्यालय की सेवानिवृत्ति पश्चात इन आलेखों को पुस्तक  रूप देना चाह रहे थे । वे इस दिशा में अग्रसर हुए ही थे कि मात्र 66 वर्ष की उम्र में ही उनका निधन हो गया था।

डॉ शैलेश शर्मा की लोकप्रियता का यह आलम है कि उनके अकस्मात निधन पर सोशल मीडिया पर दर्जनों पोस्ट श्रद्धांजलि स्वरुप चल रहे हैं।  समाज के हर वर्ग,पथ, विचार और धर्म के लोग अपनी अपनी श्रद्धांजलि प्रकट कर रहे हैं । उनका आसमय जाना हजारीबाग शहर की पत्रकारिता के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

विजय केसरी

 कथाकार/ स्तंभकार)

 पंच मंदिर चौक, हजारीबाग – 825301 ,

मोबाइल नंबर : 92347 99550.

Share This Article
कोई टिप्पणी नहीं