electricity bill issue: धनबाद में JBVNL के प्रस्ताव पर उपभोक्ताओं का जोरदार विरोध

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Electricity bill issue

धनबाद। घरेलू बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी के प्रस्ताव को लेकर धनबाद में उपभोक्ताओं का आक्रोश खुलकर सामने आया। कोयला नगर स्थित सामुदायिक भवन में झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा आयोजित जनसुनवाई में सैकड़ों उपभोक्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

दरअसल, झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने घरेलू बिजली दर 6.85 रुपये प्रति यूनिट से बढ़ाकर 10.30 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव रखा है, जो लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि है। इस प्रस्ताव को लेकर लोगों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उपभोक्ताओं का कहना था कि पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता पर यह अतिरिक्त बोझ अस्वीकार्य है।

छोटे और मंझोले उद्योगों की चिंता

जनसुनवाई में चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों ने भी अपनी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यदि प्रस्तावित दरें लागू हुईं तो जिले के छोटे और मंझोले उद्योग गंभीर संकट में आ जाएंगे। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि जब विभाग निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है, तब फिक्स्ड चार्ज और यूनिट रेट में इतनी बड़ी बढ़ोतरी क्यों की जा रही है।उद्योग प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि उत्पादन लागत बढ़ने से स्थानीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होगी और रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।

बिजली चोरी और विभागीय खामियों पर सवाल

सुनवाई के दौरान कई उपभोक्ताओं ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि हजारों करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का मुख्य कारण बिजली चोरी और आंतरिक भ्रष्टाचार है। उनका कहना था कि लाइन लॉस और चोरी रोकने में विभाग की विफलता का बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।उपभोक्ताओं ने मांग की कि पहले विभाग अपनी व्यवस्था सुधारे, ट्रांसमिशन लॉस कम करे और फिर दरों में वृद्धि पर विचार करे।

आयोग का आश्वासन

विरोध के बीच आयोग के सदस्यों ने भरोसा दिलाया कि राजस्व घाटे को एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से समायोजित किया जाएगा, ताकि जनता पर अचानक बोझ न पड़े। साथ ही, अगले छह महीनों में धनबाद में उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम शुरू करने की घोषणा की गई। इसके अलावा नंगे तार बदलने और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शुरुआती तकनीकी समस्याओं को जल्द दूर करने का आश्वासन भी दिया गया। फिलहाल, जनता दर वृद्धि के प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग कर रही है।

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