रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस ने कुर्मी और आदिवासी कार्ड खेल दिया है।
पार्टी ने इन दोनों पर ही भरोसा दिखाते हुए विधानसभा चुनाव की नैया पार करने का इरादा जता दिया है। पर भरोसा जता दिया है। इसे लेकर प्रदेश कांग्रेस में बड़ा फेरबदल किया गया है।
पार्टी आलाकमान ने अध्यक्ष राजेश ठाकुर को हटाकर केशव महतो कमलेश नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।
राजेश ठाकुर पहले कार्यकारी अध्यक्ष थे, जिन्हें बाद में 25 अगस्त 2021 को झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। अब उन्हें हटाकर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केशव महतो कमलेश को जिम्मेदारी दी गई है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केशव महतो को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का पत्र जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि केंद्रीय अध्यक्ष की सहमति से केशव महतो को यह जिम्मेदारी दी गई है।
इसके साथ ही राजेश ठाकुर की उनके काम के लिए सराहना भी की गई है। इसके अलावा पार्टी ने रामेश्वर उरांव को झारखंड कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाया है। कहा जा रहा है कि ये दोनों बदलाव आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए किये गये हैं।
फिलहाल झारखंड कांग्रेस संगठन में सिर्फ दो ही बदलाव किए गए हैं। इसके बाद किसी के नाम की चर्चा फिलहाल नहीं है। चुनाव से पहले इसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
पार्टी ने राजेश ठाकुर को हटाकर केशव महतो कमलेश को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। केशव महतो अब झारखंड कांग्रेस को चुनाव में आगे ले जाएंगे। ये फैसला पार्टी आलाकमान ने लिया है।
झारखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने संगठन में नई जान फूंकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
दरअसल केशव महतो कमलेश कांग्रेस में नया नाम नहीं है। वह पहले भी पार्टी में प्रमुख जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
इतना ही नहीं, कुर्मी समाज के वह बड़े नेता माने जाते हैं। सिल्ली विधानसभा क्षेत्र से वह विधायक भी रहे हैं। आज सिल्ली से सुदेश महतो विधायक हैं।
एक जमाना था, तब केशव महतो कमलेश से बड़ा कोई कुर्मी नेता नहीं था। 90 के दशक में केशव महतो कमलेश एक आवाज पर कर्मी समाज उठ खड़ा होता था।
इतना ही नहीं अपने समाज के नीति निर्धारकों में वह सबसे अगुआ था। राज्य गठन के बाद जब कांग्रेस ने प्रदीप बलमुचू और अन्य युवा नेताओं की सक्रियता बढ़ी, तो केशव धीरे-धीरे हाशिये पर चले गये।
इस बची सुदेश महतो और अमित महतो जैसे युवा कुर्मी नेता तेजी से आगे बढ़े, जिसके कारण केशव महतो की सक्रियता कम दिखने लगी।
हालांकि पिछले एक-दो सालों से पार्टी में केशव महतो कमलेश की सक्रियता दिख रही थी। इन दिनों लगातार वह दिल्ली भी आना-जाना कर रहे थे। और अंततः नतीजा सामने है। पार्टी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है।
इसी प्रकार रामेश्वर उरांव को आगे कर कांग्रेस ने आदिवासी कार्ड भी खेल दिया है। रामेश्वर उरांव कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। आदिवासी हैं और पूर्व आइपीएस भी हैं।
इनके पास भी अच्छा खासा राजनीतिक अनुभव है। पार्टी के अंदर माना जाता है कि सारे असंतुष्ट इनकी बात सुनते हैं।
ऐसे तो राजेश ठाकुर को हटाकर पार्टी ने सारे असंतुष्टों की नाराजगी दूर कर ही दी है। बावजूद इसके रामेश्वर उरांव को जिम्मेदारी मिलने से संगठन को मजबूती मिलनी तय है।
बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान रामेश्वर उरांव कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष। इनके नेतृत्व में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 18 सीटों पर जीत हासिल की थी।
पार्टी आलाकमान की जेहन में उनका ये प्रदर्शन भी रहा ही होगा। तब ही अन्य आदिवासी नेताओं की अपेक्षा पार्टी ने इन पर अपना भरोसा जताया है।
बहरहाल कांग्रेस में अब राजेश ठाकुर युग समाप्त हो चुका है और पुराने अनुभवी एवं निष्ठावान कांग्रेसी केशव महतो कमलेश के हाथों में अब कमान है।
उनके साथ अनुभवी आदिवासी नेता रामेश्वर उराव खड़े हैं। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि निश्चित ही कांग्रेस का ये दांव खाली नहीं जायेगा।
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