CJI:
नागपुर, एजेंसियां। भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि संविधान और नागरिकों के अधिकारों को बनाए रखने के लिए न्यायिक सक्रियता जरूरी है। यह बनी रहेगी, लेकिन इसे न्यायिक आतंकवाद में नहीं बदला जा सकता।
CJI: लोकतंत्र के तीनों अंगों की सीमा तयः
CJI ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को उनकी सीमाएं दी गई हैं। तीनों को कानून के अनुसार काम करना होगा। जब संसद कानून या नियम से परे जाती है, तो न्यायपालिका हस्तक्षेप कर सकती है।
CJI गवई नागपुर जिला कोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में बोल रहे थे। यहां उन्होंने कुछ किस्से साझा किए। अपने माता-पिता के संघर्षों के बारे में बताया। अपने जीवन पर माता-पिता के प्रभाव के बारे में बात करते हुए भावुक हो गए।

CJI: CJI बोले- पिता भी बनना चाहते थे वकीलः
CJI ने कहा, “मैं आर्किटेक्ट बनना चाहता था, लेकिन मेरे पिता ने मेरे लिए अलग सपने देखे थे। वह हमेशा चाहते थे कि मैं वकील बनूं, एक ऐसा सपना जो वह खुद पूरा नहीं कर सके। मेरे पिता ने खुद को अंबेडकर की सेवा में समर्पित कर दिया। वह खुद एक वकील बनना चाहते थे, लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा होने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, इसलिए वह अपनी इच्छा पूरी नहीं कर सके।”
CJI: पिता के लिए अपने सपने छोड़ दियेः
जस्टिस गवई ने बताया कि वे संयुक्त परिवार में रहते थे, जिसमें कई बच्चे थे और सारी जिम्मेदारी उनकी मां और चाची पर थी। इसलिए अपने पिता की इच्छा पूरी करने के लिए उन्होंने आर्किटेक्ट बनने के अपने सपने को छोड़ दिया।
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