भाजपा के चाणक्य क्या बदल सकते है चुनावी परिणाम?

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नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते 18 मई को रांची लोकसभा क्षेत्र के चुटिया इलाके में रोड शो किया।

रोड शो में वे ओपेन जीप पर सवार थे और उनके बगल में रांची से भाजपा प्रत्याशी संजय सेठ थे खड़े थे। लगभग पौन घंटे चले इस रोड़ शो में हजारो लोग शामिल हुए।

अमित शाह इससे पहले 10 मई को झारखंड आए थे। तब उन्होंने खूंटी में एक जनसभा को संबोधित किया था।

वे खूंटी से भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के पक्ष में वोट मांगने आए थे। खूंटी की जनसभा में आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने भी शिरकत की थी।

मंच से अमित शाह ने झारखंड से जुड़े कई मुद्दे उठाये थे। नक्सलवाद और संताल परगना में बांगलादेशी घुसपैठ पर वह खूब बोले थे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भाजपा के स्टार कैंपेनर हैं। वह बीजेपी के केन्द्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। पार्टी के कार्यकर्ताओं पर उनकी अच्छी पकड़ है।

अपनी सूझ बूझ के कारण वह पार्टी के चाणक्य भी कहे जाते हैं। 2019 में जब अमित शाह देश के गृह मंत्री बने, तो उन्होंने कई बड़ी चुनौतियों को पार किया।

चाहे जम्मू कश्मीर में 370 हटने के बाद शांति बहाल करना हो या दिल्ली में किसान आंदोलनकारियों पर अंकुश पाना हो या फिर सीएए पर कड़े बयान देना।

2014 के लोकसभा चुनाव के समय उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था और भाजपा ने 2014 में उत्तर प्रदेश में 80 में से कुल 73 सीटें जीत ली।

कहा जाता है कि उनकी रैलियों और जनसभाओं से वोटरों पर खासा प्रभाव पड़ता है। 2019 के लोकसभा चुनावों में अमित शाह ने चतरा से भाजपा प्रत्याशी सुनिल कुमार सिंह के लिए रैली की थी।

रैली में उन्होंने सरकार बनने पर कश्मीर से धारा 370 हटाने की बात कही थी। उस साल भाजपा प्रत्याशी सुनिल कुमार सिंह रिकॉर्ड वोटों से विजयी हुए थे।

उन्हें पांच लाख 28 हजार वोट मिले थे, वहीं दूसरे नंबर पर कांग्रेस के मनोज यादव थे, जिन्हें डेढ़ लाख वोट मिले थे।

चतरा के बाद उनकी अगली जनसभा आठ अप्रैल को जमशेदपुर और धनबाद में हुई। यहां उन्होंने लोगों से गांव, गौमाता और गंगा पर वोट करने को कहा था।

जनता ने भी अपना मत दिया और भाजना ने धनबाद में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की। धनबाद से भाजपा प्रत्याशी पीएन सिंह चार लाख 86 हजार मतों के फासले से चुनाव जीते।

वहीं जमशेदपुर में भाजपा के विद्युत वरण महतो तीन लाख से अधिक वोटों से विजयी हुए थे।

इससे पहले अमित शाह 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी सक्रिय रहे थे। उत्तर प्रदेश का प्रभारी होते हुए भी उन्होंने देश के कई हिस्सों में चुनाव प्रचार किया था।

इस क्रम में वह झारखंड भी आये थे। झारखंड के गोड्डा में अप्रैल में उन्होंने निशिकांत दुबे के पक्ष में प्रचार किया था और देवघर और गोड्डा को कवर किया था।

इस चुनाव में निशिकांत दुबे को जीत मिली थी। इसके बाद वह पलामू आये थे, जहां से बीजेपी उम्मीदवार बीडी राम भारी बहुमत से जीते।

यदि अमित शाह के झारखंड में चुनावी दौरों पर गौर करेंगे, तो स्पष्ट है कि जिन भी सीटों पर उनकी सभाएं हुईं, वे बीजेपी की झोली में गई।

जाहिर है, अमित शाह की रैलियों और जनसभाओं से भाजपा के कार्यकर्ता और मतदाता, दोनों को ही नई ऊर्जा मिलती है।

बीते 18 मई को रांची के चुटिया में हुई रैली में भी लोगों का उत्साह दिखा। बच्चे हों या बूढ़े या फिर महिलाएं सभी अमित शाह की एक झलक पाने के लिए उतावले थे।

भाजपा का दावा है कि इसका असर चुनावी परिणाम में भी जरूर देखने को मिलेगा।

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