बड़ी खबर: HEC का BHEL में विलय का प्रस्ताव तैयार

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रांची। HEC का BHEL में विलय होने जा रहा है। इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। यह प्रस्ताव कैबिनेट की अगली बैठक में लाया जा सकता है।

कैबिनेट से पारित होने के बाद विलय की प्रक्रिया पूरी हो जायेगी। BHEL द्वारा ही विलय का यह प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

एचइसी की वर्तमान आर्थिक स्थिति, देनदारी, प्लांटों के जीर्णोद्धार एवं करीब 1200 करोड़ रुपये के कार्यादेश को देखते हुए एचइसी को भेल में विलय करने का निर्णय लिया गया है।

हालांकि अभी प्रस्ताव प्रारंभिक चरण में है। विलय के बाद एचईसी भेल की यूनिट के रूप में काम करेगी। इसके बाद एचईसी भेल की जरूरतों को पूरा करेगा। भेल ही एचईसी के प्लांटों का आधुनिकीकरण भी करेगा।

HEC के एक अधिकारी ने बताया कि एचईसी के पास आज भी ऐसे-ऐसे उपकरण बनाने की क्षमता है, जो देश की अन्य कंपनियां नहीं बना सकती हैं।

वर्तमान में एनसीएल ने 450 करोड़ रुपये का कार्यादेश निकाला है, जिसे सिर्फ HEC ही पूरा कर सकता है। वहीं इसरो, सेना, सेल, कोल इंडिया के लिए उपकरण एवं स्पेयर पार्ट्स आपूर्ति करने में एचइसी की महती भूमिका है।

बता दें कि कि भेल और एचईसी दोनों भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन हैं। भेल और एचईसी दोनों रणनीतिक और इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए काम करते हैं।

एचईसी के पास तीन प्लांट हैं और इनमें फोर्जिंग, मशीनिंग से लेकर टूल्स निर्माण के भी प्लांट हैं। एचईसी सभी तरह के उपकरणों का निर्माण करता है।

पिछले तीन साल से एचईसी में स्थायी सीएमडी की नियुक्ति नहीं की गयी है। भेल के सीएमडी और चार निदेशक ही एचईसी के प्रभार में हैं।

इन तीन सालों में भेल के अधिकारियों ने भेल की यूनिट के रूप में एचईसी की उपयोगिता पर रिपोर्ट भी मंत्रालय को सौंपी है। इसके बाद से ही दोनों के विलय पर मंत्रालय ने विचार करना शुरू किया।

बदहाल है HEC

HEC इन दिनों बदहाल है। बकाया वेतन की मांग को लेकर एचईसी के कर्मचारी आंदोलनरत हैं।

एचईसी बचाओ मजदूर जन संघर्ष समिति ने वेतन भुगतान और अन्य मांगों को लेकर सोमवार को पूरा एचईसी टाउनशिप बंद करने की घोषणा की है।

बता दें कि एचईसी में कर्मचारियों का 18 माह और अफसरों का 22 माह से वेतन बकाया है।

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