पोर्श एक्सीडेंट केस में नाबालिग को जमानत, बॉम्बे HC बोला- अपराध चाहे कितना गंभीर हो, आरोपी की उम्र नजरअंदाज नहीं कर सकते [Bail to minor in Porsche accident case, Bombay HC said – no matter how serious the crime is, the age of the accused cannot be ignored]

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पुणे, एजेंसियां। पुणे पोर्श एक्सीडेंट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी नाबालिग को जमानत दे दी है।

साथ ही उसे बाल सुधार गृह से तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि हमें आरोपी के साथ वैसे ही पेश आना होगा, जैसे हम कानून का उल्लंघन करने वाले किसी और बच्चे के साथ पेश आते। फिर चाहे अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो।

नाबालिग आरोपी ने 18-19 मई की रात पुणे के कल्याणी नगर इलाके में IT सेक्टर में काम करने वाले बाइक सवार युवक-युवती को टक्कर मारी थी, जिससे दोनों की मौत हो गई।

घटना के समय आरोपी नशे में था। वह 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पोर्श स्पोर्ट्स कार चला रहा था। उसे 22 मई को बाल सुधार गृह भेजा गया था।

नाबालिग को गाड़ी चलाने पर किसे और क्या सजा

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 180 यह कहती है कि आपने बिना लाइसेंस के किसी नाबालिग या दोस्त को अपनी गाड़ी चलाने को दे दी, तो 3 महीने की सजा या 5 हजार रुपये का जुर्माना या फिर दोनों हो सकता है।

मोटर वाहन कानून के अनुसार, बिना लाइसेंस के किसी बच्चे को गाड़ी चलाने के लिए देना गलत है।

नाबालिग को गाड़ी चलाने पर सजा

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 180 यह कहती है कि आपने बिना लाइसेंस के किसी नाबालिग या दोस्त को अपनी गाड़ी चलाने को दे दी, तो 3 महीने की सजा या 5 हजार रुपये का जुर्माना या फिर दोनों हो सकता है।

मोटर वाहन कानून के अनुसार, बिना लाइसेंस के किसी बच्चे को गाड़ी चलाने के लिए देना गलत है।

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