Babri construction Murshidabad: मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी’ निर्माण की शुरुआत, बंगाल से यूपी तक तेज हुई सियासी जंग

3 Min Read

Babri construction Murshidabad

मुर्शिदाबाद, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में बुधवार को ‘नई बाबरी मस्जिद’ के निर्माण की औपचारिक शुरुआत हो गई। जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष और विधायक हुमायूं कबीर के नेतृत्व में करीब 1200 लोगों ने कुरान पाठ किया, जिसके बाद निर्माण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया।

इस कदम के साथ ही मुद्दा सियासी रंग ले चुका है और इसकी गूंज बंगाल से निकलकर उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई है। पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में यह मामला राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

योगी आदित्यनाथ का बयान, बढ़ा विवाद

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “बाबरी मस्जिद जैसी संरचना कभी दोबारा नहीं बन सकेगी” और “कयामत का दिन कभी नहीं आएगा, इसलिए बाबरी मस्जिद कभी नहीं बन सकेगी।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।

अखिलेश यादव का तंज

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें उर्दू शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री उर्दू के खिलाफ बोलते हैं, तो फिर ‘कयामत’ जैसे शब्द का प्रयोग क्यों कर रहे हैं। अखिलेश के इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।

कांग्रेस और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा कि देश में फिर से नफरत का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे बीजेपी और टीएमसी के बीच की “नूरा कुश्ती” बताया और कहा कि बाबरी नाम पर मस्जिद बननी नहीं चाहिए। वहीं हुमायूं कबीर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि कोई निर्माण रोकना चाहता है तो उसे मुर्शिदाबाद आना होगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया था, इसलिए इस प्रोजेक्ट का विरोध समझ से परे है।

चुनावी समीकरण और ‘एम फैक्टर’

मुर्शिदाबाद जिला मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, जहां करीब 66 से 70 प्रतिशत आबादी मुस्लिम समुदाय की है। जिले की 26 में से लगभग 20 विधानसभा सीटें मुस्लिम बहुल मानी जाती हैं। शमशेरगंज और सुति जैसे इलाकों में मुस्लिम आबादी 70 से 80 प्रतिशत तक है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है।

Share This Article
Exit mobile version