किसने बोयी वो फसल, जिसे काट रहे केजरीवाल
नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल दो जून को एक बार फिर जेल चले जायेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वह चुनाव प्रचार के लिए 10 मई को अंतरिम जमानत पाकर तिहाड़ जेल से बाहर आये थे।
उन्हें एक जून तक के लिए अंतरिम जमानत मिली थी। दो जून को सरेंडर से पहले शुक्रवार को केजरीवाल ने दिल्लीवासियों के लिए एक भावुक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने अपनी सेहत खराब होने का हवाला दिया।
लोगों की संवेदना को उकेरने की कोशिश करते हुए उन्होंने यहां तक कहा कि हो सकता है खराब सेहत के कारण उनकी मृत्यु हो जाये।
कहा कि ऐसे में आपलोग ही मेरी पत्नी और परिवार का ख्याल रखिएगा। साथ ही केंद्र सरकार पर उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया।
दरअसल, केजरीवाल पर जो गंभीर आरोप लगे हैं, उसे लेकर शायद वह भी जानते हैं कि अभी उन्हें जेल में रहना पड़ सकता है।
इसीलिए वह अब सिम्पैथी कार्ड खेल रहे हैं। वह अपनी बीमारियों का हवाला दे रहे हैं, जो उन्हें काफी पहले से हैं।
उधर विपक्ष का आरोप है कि क्या केजरीवाल को मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते समय अपनी बीमारियों के बारे में जानकारी नहीं थी।
बीजेपी ने ये भी कहा कि जो व्यक्ति खुद को इतना बीमार बता रहा है वह इतने बड़े-बड़े घोटालों में भागीदार क्यों बन गया।
आखिर किसने बोयी वो फसल, जिसे आज केजरीवाल काट रहे हैं। क्या खुद उन्होंने, यह बड़ा सवाल है। इसके लिए हमें केजरीवाल पर लगे आरोपों को ठीक से समझना होगा।
बता दें कि अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहते हुए जेल जाने वाले पहले नेता बन गए हैं।
ईडी ने गिरफ्तारी से पहले केजरीवाल को कुल 9 समन जारी किए थे, जिसे उन्होंने नजरअंदाज कर दिया था।
ईडी के मुताबिक केजरीवाल ‘दिल्ली आबकारी नीति घोटाले के सरगना और मुख्य साजिशकर्ता” हैं।
केजरीवाल पर आरोप है कि कुछ व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने की साजिश में शामिल थे और इस लाभ के बदले शराब व्यवसायियों से रिश्वत की मांग की।
इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने गोवा विधानसभा चुनाव में अपराध की आय का इस्तेमाल किया, जिसमें केजरीवाल मुख्य निर्णयकर्ता हैं।
इससे पहले, ईडी ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल ने आबकारी घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक समीर महेंद्रू से वीडियो कॉल पर बात की थी और उनसे इस घोटाले के सह-आरोपी विजय नायर के साथ काम जारी रखने के लिए कहा था।
केजरीवाल ने नायर को “अपना लड़का” बताया था। बता दें कि विजय नायर, आम आदमी पार्टी के पूर्व कम्यूनिकेशन इंचार्ज हैं।
इतना ही नहीं, अतिरिक्ट सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत में कहा कि अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए साउथ ग्रुप से 100 करोड़ रुपए मांगे थे।
आरोप है कि साउथ ग्रुप से प्राप्त करीब 45 करोड़ रुपए का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी ने गोवा विधानसभा चुनाव में किया।
गोवा चुनाव में जो पैसा इस्तेमाल हुआ, वह हवाला के जरिये आया था। बताते चलें कि ईडी ने आबकारी घोटाले में दक्षिण भारत के कुछ नेताओं और बिजनेसमैन को भी आरोपी बनाया है।
एजेंसी ने इन्हें ‘साउथ ग्रुप’ के रूप में नामित किया है। साउथ ग्रुप में वाईएसआरसीपी सांसद मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी (एमएसआर), उनके बेटे मगुंटा राघव रेड्डी, बीआरएस नेता के कविता, चार्टर्ड अकाउंटेंट बुचीबाबू गोरांटला, हैदराबाद के व्यवसायी अभिषेक बोइनपल्ली और एक प्रमुख फार्मास्युटिकल कंपनी के निदेशक पी सरथ कैंड्रा रेड्डी शामिल हैं।
ईडी के अनुसार, केजरीवाल दिल्ली की विवादित आबकारी नीति 2021-22 के निर्माण में सीधे तौर पर शामिल थे।
इस नीति को खासतौर से साउथ ग्रुप को दिए जाने वाले लाभ को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था।
ईडी का दावा है कि साउथ ग्रुप ने आबकारी नीति के जरिये अनुचित लाभ लिया, थोक व्यवसायों और कई खुदरा क्षेत्रों में हिस्सेदारी हासिल की और इसके बदले में आप नेताओं को 100 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
साउथ ग्रुप के कथित सदस्यों में से एक बीआरएस नेता और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता भी हैं, जिन्हें एजेंसी ने 15 मार्च को गिरफ्तार किया था।
कविता की गिरफ्तारी के बाद ईडी ने 18 मार्च को पहली बार आरोप लगाया कि केजरीवाल इस मामले में साजिशकर्ता थे।
ईडी ने कहा कि जांच से पता चला है कि के. कविता ने अन्य लोगों के साथ मिलकर दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में लाभ पाने के लिए अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित AAP के शीर्ष नेताओं के साथ साजिश रची थी।
इन एहसानों के बदले, वह आप के नेताओं को 100 करोड़ रुपये का भुगतान करने में शामिल थीं।
अब आपको बताते हैं कि क्या है दिल्ली लीकर पालिसी, जिसमें केजरीवाल और उनके मंत्री फंसे हैं।
अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी सरकार, 2021-22 में नई उत्पाद शुल्क नीति या आबकारी नीति ले आई।
यह नीति नवंबर 2021 में लागू हुई, लेकिन विवाद के बाद जुलाई 2022 में रद्द कर दी गई। पूरा विवाद इसी नीति पर केंद्रित है।
उत्पाद शुल्क नीति के संबंध में दो मुकदमें दर्ज हैं। एक सीबीआई द्वारा, और दूसरा कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी द्वारा।
आरोप है कि इस नीति के तहत सस्ती शराब बेची गई और सरकार का राजस्व घटा कर शराब कंपनियों को मुनाफा पहुंचाया गया।
इसके एवज में शराब कंपनियों से मोटी रकम वसूली गई। इससे दिल्ली सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ।
विवाद की शुरुआत जुलाई 2022 में दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार द्वारा उपराज्यपाल (एलजी) विनय कुमार सक्सेना को सौंपी गई एक रिपोर्ट से हुई, जिसमें दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 के निर्माण में कथित प्रक्रियात्मक खामियों की ओर इशारा किया गया था।
मुख्य सचिव की रिपोर्ट में कहा गया है कि आबकारी मंत्री के रूप में सिसोदिया द्वारा लिए गए “मनमाने और एकतरफा फैसलों” के परिणामस्वरूप “राजकोष को 580 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान” हुआ।
मुख्य सचिव ने यह आरोप भी लगाया कि लाइसेंस शुल्क में छूट और विस्तार, जुर्माने पर छूट और कोविड-19 के कारण उत्पन्न व्यवधानों के कारण राहत के बदले आम आदमी पार्टी और इसके नेताओं ने शराब व्यवसायों के मालिकों और संचालकों से रिश्वत ली।
इस पैसे का इस्तेमाल पंजाब और गोवा में विधानसभा चुनावों को “प्रभावित” करने के लिए किया गया था।
यह रिपोर्ट सीबीआई को भेजी गई और 26 फरवरी, 2023 को सिसोदिया की गिरफ्तारी हुई।
इसके अलावा केजरीवाल के खिलाफ कई और आरोप हैं। कुछ आलोचकों ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल की कार्यशैली अलोकतांत्रिक है।
उनका मानना है कि वे निर्णय लेने में अकेले काम करते हैं और पार्टी के अन्य सदस्यों की राय को महत्व नहीं देते।
केजरीवाल और उनकी पार्टी पर राजनीतिक विरोधियों पर व्यक्तिगत हमले करने और अनावश्यक विवाद उत्पन्न करने के आरोप भी लगे हैं।
उन्हें यह भी कहा गया है कि वे विपक्षी नेताओं पर गलत आरोप लगाते हैं।
केजरीवाल पर यह आरोप भी लगाए गए हैं कि वे चुनावों के दौरान झूठे वादे करते हैं और बाद में उन्हें पूरा नहीं करते। कुछ योजनाओं का क्रियान्वयन भी सही तरीके से न होने के आरोप लगे हैं।
दरअसल अरविंद केजरीवाल आज पूरे देश में चर्चा में हैं, क्योंकि उन्हें चर्चा में रहना आता है। उनके विरोधी उन्हें ड्रामेबाज भी कहते हैं।
विरोधी उनके पहनावों से लेकर उनके आंसू और मुस्कान तक को नकली बताते हैं। एक जमाने में पानी पी पी कर कांग्रेस को खरी खोटी सुनानेवाले केजरीवाल आज उसी कांग्रेस के साथ गले मिल रहे हैं।
दरअसल केजरीवाल सामान्य राजनीतिज्ञ नहीं हैं। वह काफी दूर की सोच कर कदम बढ़ाते हैं। उन्हें जाननेवालों का कहना है कि वे एक कदम भी बिना मतलब के नहीं बढ़ाते।
विरोधियों का तो ये भी कहना है कि केजरीवाल ने महान समाजसेवी अन्ना हजारे को भी नहीं बक्शा।
पूरी योजना बनाकर वह अन्ना के आंदोलन में शामिल हुए और उनके नाम का सहारा लेकर दिल्ली की सत्ता तक पहुंच गये।
दरअसल अरविंद केजरीवाल उच्च शिक्षा प्राप्त हैं, वह प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं। इसलिए उनमें सूझबूझ की कमी नहीं है।
51 वर्षीय केजरीवाल एक पूर्व नौकरशाह और कर निरीक्षक हैं। उन्होंने भारतीय राजनीतिक प्रणाली और सरकार को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए 2012 में आम आदमी पार्टी को लांच करने में अग्रणी भूमिका निभाई।
उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह – झाड़ू – और भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने का उसका वादा नई दिल्ली के करीब 20 मिलियन लोगों के दिलों में घर कर गया।
उन्होंने मध्यम वर्ग के लोगों की नब्ज पकड़ी और पानी, बिजली तथा राशन फ्री कर लोगों के बीच छा गये। 2015 में उनकी पार्टी ने 67 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी।
पिछले 9 वर्षों में केजरीवाल ने गरीब-हितैषी नीतियों को आगे बढ़ाया। केजरीवाल ने पहले कहा था कि वह और उनका आंदोलन “किसी विचारधारा से नहीं बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं”।
आज वह आम आदमी पार्टी को एक विचारधारा बता रहे हैं। आप की स्थापना 2012 में स्वघोषित गांधीवादी अन्ना हजारे के नेतृत्व में देशव्यापी भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के बाद हुई थी।
ये विरोध प्रदर्शन कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार के तहत अरबों डॉलर के भ्रष्टाचार घोटालों के चलते शुरू हुए थे।
2015 में, उनकी पार्टी ने ऐतिहासिक जनादेश प्राप्त कर भाजपा को मात्र तीन सीटों तक सीमित कर दिया, जबकि कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली।
केजरीवाल उत्तर भारतीय राज्य हरियाणा से हैं। उन्होंने भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।
आज अरविंद केजरीवाल एक बार फिर दिल्ली के लोगों की भावनाओं को उकेर कर जांच एजेंसियों और केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल पर लगाए गए शराब घोटाले के आरोप ने भारतीय राजनीति में व्यापक प्रभाव छोड़ा है।
घोटाले के आरोप ने केजरीवाल और उनकी सरकार को विवादों में लपेटा है।
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