नयी दिल्ली, एजेंसियां : उच्चतम न्यायालय ने सेना को एक पूर्व कर्मी को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है जिसे डॉक्टरों द्वारा गलती से एड्स पीड़ित बताए जाने के बाद दो दशक से अधिक समय पहले सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
न्यायालय ने कहा कि लंबी कानूनी लड़ाई लड़ते हुए उसे (याचिकाकर्ता को) मानसिक आघात और सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक सत्यानंद 1993 में भारतीय सेना में भर्ती हुआ था और आठ साल से अधिक समय तक सेवा करने के बाद उसे 27 साल की कम उम्र में इस आधार पर छुट्टी दे दी गई थी कि उसे आगे की सेवा के लिए मेडिकल रूप से अयोग्य पाया गया।
सत्यानंद ने न्याय पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक सभी कानूनी मंचों का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने तर्क दिया कि डायग्नोसिस में त्रुटि हुई थी और बिना किसी इलाज के इतने वर्षों के बाद भी वह स्वस्थ थे. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलील स्वीकार कर ली।
अदालत ने निर्देश दिया कि पूर्व सैन्यकर्मी सत्यानंद सिंह कानून के अनुसार पेंशन के हकदार होंगे जैसे कि उन्होंने सेवा जारी रखी हो।
पीठ ने एचआईवी पॉजिटिव लोगों के प्रति प्रचलित सामाजिक कलंक और भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण पर भी चिंता व्यक्त की।
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