Abu Salem release plea rejected: 1993 धमाकों के दोषी अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, रिहाई याचिका खारिज

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Abu Salem release plea rejected:

मुंबई, एजेंसियां। 1993 मुंबई बम धमाकों के दोषी गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उसकी अग्रिम रिहाई की याचिका खारिज कर दी। इससे पहले करीब 10 दिन पहले Bombay High Court ने भी उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अबू सलेम ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के समय हुए समझौते के मुताबिक उसकी सजा 25 साल से अधिक नहीं हो सकती। उसने दावा किया कि वह लगभग उतनी या उससे अधिक अवधि जेल में बिता चुका है, इसलिए उसे रिहा किया जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उसकी इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई से इनकार करते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा, “आपको टाडा (आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां अधिनियम) के तहत सजा मिली है। आप समाज का भला करने के लिए जेल में नहीं हैं।”कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सजा की गणना और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में ही की जानी चाहिए। यदि उसे अंतरिम जमानत या जल्द सुनवाई की मांग करनी है तो वह हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।

10 दिन पहले हाई कोर्ट से भी नहीं मिली राहत

गौरतलब है कि 10 दिन पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने अबू सलेम की इमरजेंसी पैरोल याचिका भी खारिज कर दी थी। वह अपने भाई के निधन के बाद अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आजमगढ़ जाना चाहता था। इसके लिए उसे पुलिस एस्कॉर्ट शुल्क के रूप में करीब 17.60 लाख रुपये जमा करने थे, जो वह नहीं दे पाया। इसी कारण उसकी पैरोल याचिका खारिज कर दी गई थी।

2005 में हुआ था प्रत्यर्पण

अबू सलेम को 2005 में पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। 1993 के मुंबई बम धमाकों में 250 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। इस मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद फिलहाल उसकी रिहाई की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है और वह जेल में ही रहेगा।

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