नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में “आदि महोत्सव” का उद्घाटन किया।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि आदि महोत्सव न केवल आदिवासी कारीगरों की असाधारण प्रतिभा और शिल्प कौशल को प्रदर्शित करने का एक मंच है, बल्कि जनजातीय संस्कृति, जीवनशैली और वैभवशाली परंपराओं को प्रदर्शित करने का एक प्रयास भी है।
इस वर्ष 1000 कारीगरों की भागीदारी ने इस आयोजन की जीवंतता को बढ़ा दिया है,जिससे आगंतुकों को उत्कृष्ट जनजातीय कृतियों के रचनाकारों के साथ जुड़ने का एक अनूठा अवसर मिलेगा।
लगे हैं 300 से ज्यादा स्टॉल
आदि महोत्सव में 300 से अधिक स्टॉल लगाये गये हैं। इसके साथ ही यहां 9 दिनों तक आकर्षक जनजातीय संगीत का कार्यक्रम भी होगा।
अनोखी कलाकृतियां होंगी। तरह-तरह के स्वादिष्ट जनजातीय व्यंजन होंगे और अपनी खूबसूरत पोशाकों में थिरकते हमारे जनजातीय भाई-बहनों के नृत्य होंगे।
महोत्सव में शनिवार को अनुसूचित जनजातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (वीसीएफ-एसटी)योजना का शुभारम्भ किया। इसका मकसद एसटी समुदाय के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
5 करोड़ रुपये तक की धनराशि प्रदान की जाएगी
इस योजना के तहत अनुसूचित जनजातीय युवाओं में उद्यमिता/स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए 4 प्रतिशत की रियायती दर पर 10 लाख रुपये से 5 करोड़ रुपये तक की धनराशि प्रदान की जाएगी।
महिला एवं दिव्यांग जन उद्यमियों को इस योजना के अंतर्गत विशेष छूट का प्रावधान है जिसके तहत उन्हें यह सहायता सिर्फ 3.75 प्रतिशत की दर पर उपलब्ध करायी जाएगी।
अनुसूचित जनजातीय समुदाय के युवाओं के लिए एक विशेष प्रावधान रखा गया है जो विभिन्न तकनीकी संस्थानों से जुड़े हैं।
उन्हें अपना उद्यम स्थापित करने के लिए इस योजना के तहत तीन साल की अवधि में 10 लाख रुपए प्रति वर्ष की दर से 30 लाख रूपए तक की एक विशेष धनराशि प्रदान की जाएगी।
यह योजना जहाँ हमारे जनजातीय युवा को नए उद्यमी और नए निर्माता बनाने का अवसर देगी। वहीं, यह योजना जनजातीय सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
इस अवसर पर जनजातीय कार्य राज्य मंत्री डॉ भारती पवार और ट्राइफेड के अध्यक्ष रामसिंह राठवा उपस्थित रहे।
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