Multi-generation wedding
गुमला। गुमला जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत तिलगा गांव में रविवार को एक भावनात्मक और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। नवयुवक संघ द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 121 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे। ये वे जोड़े थे, जो वर्षों से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे और सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहे थे। इस आयोजन ने उन्हें समाज में सम्मान और पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया।
मां-बेटी ने एक साथ लिए सात फेरे
कार्यक्रम का सबसे मार्मिक क्षण वह रहा जब एक ही मंडप में मां और बेटी ने अपने-अपने जीवनसाथियों के साथ सात फेरे लिए। आश्रिता उरांव अपने पति के साथ विवाह बंधन में बंधीं, वहीं उनकी मां झांझो उरांइन ने भी पति विष्णु उरांव के साथ वैदिक मंत्रों के बीच सात फेरे लिए। मंडप में मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। कई जोड़े ऐसे थे, जिनकी गोद में बच्चे थे, तो कुछ उम्र के ढलान पर पहुंचकर सामाजिक स्वीकृति पाने आए थे।
वर्षों की पीड़ा को मिला सुकून
इन परिवारों को वर्षों तक सामाजिक तिरस्कार झेलना पड़ा। शुभ कार्यों में शामिल होने से रोका जाता था, यहां तक कि पुश्तैनी संपत्ति पर भी अधिकार नहीं मिल पा रहा था। बच्चों के भविष्य पर भी इसका असर पड़ा। लेकिन इस सामूहिक विवाह ने उनकी जिंदगी को नया मोड़ दिया।
समाज में नई शुरुआत
विवाह के बाद अब इन जोड़ों को समाज में पूर्ण स्वीकृति मिलेगी। वे सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों में भाग ले सकेंगे और उनके बच्चों का भविष्य भी सामान्य सामाजिक दायरे में आगे बढ़ सकेगा। वैदिक मंत्रों के साथ जनजातीय गीतों की गूंज ने कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया। तिलगा गांव की यह पहल सामाजिक समरसता और इंसानियत की मिसाल बन गई है।







