कोलकाता, एजेंसियां। इस साल अंग्रेजी के 31 मार्च से हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत की शुरुआत हो चुकी है। याद कीजिए कल ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम के 120वें एपिसोड में हिंदू नव वर्ष के पहले दिन शुभकामनाएं दी थीं और सांस्कृतिक रूप से इसके महत्व का संकेत किया था। हम जानते हैं कि हिंदी में दो तरह के तिथिगत कैलेंडर हैं।
एक विक्रम संवत और दूसरा शक संवत। इस साल विक्रम संवत 2082 होता है। मतलब अंग्रेजी के साल में 57 वर्ष जोड़ दीजिए तो विक्रम संवत की जानकारी मिल जाएगी। मतलब 57 वर्ष ईसा पूर्व से इसकी तिथि मानी जाती है।
शक संवत की शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने की थी
शक संवत की शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने की थी। भारतीय इतिहास में कुषाण वंश के सम्राट कनिष्क ने 78 ईस्वी में की थी। मतलब अंग्रेजी के ईयर में 78 साल घटा दीजिए तो वह शक संवत मिल जाएगा। विक्रम संवत की शुरुआत करने में एक प्रतापी राजा का नाम आता है। उनका नाम था विक्रमादित्य। जैन ग्रंथ कल्काचार्य कथा के अनुसार विक्रम काल की स्थापना राजा विक्रमादित्य द्वारा की गई थी।
वैज्ञानिक रूप से खरा है विक्रम संवत
संस्कृत के विद्वान रहे और भारत रत्न प्रोफेसर पांडुरंग वामन काणे ने अपनी पुस्तक ‘धर्मशास्त्र का इतिहास’ में विक्रम संवत का जिक्र विस्तार से किया है। उनके अनुसार, ‘विक्रम संवत सबसे वैज्ञानिक है पश्चिमी कैलेंडर में सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण और अन्य खगोलीय परिस्थितियों की कोई जानकारी पहले से नहीं मिलती है, जबकि विक्रम संवत बता देता है कि आने वाले किस दिन ग्रहण होगा। यह वैज्ञानिकता सर्वमान्य है। मतलब भारतीय संस्कृति में कुछ भी वैज्ञानिकता से रहित नहीं है।
चैत नवरात्र की शुरुआत ही विक्रम संवत का पहला दिन
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का पहला दिन नव संवत्सर यानी विक्रम संवत 2082। इसे हिंदू नववर्ष कहा जाता है और सनातन परंपरा के प्रतीक के रूप में काल गणना के लिए सबसे सटीक कैलेंडर के तौर पर जाना जाता है। दावा है कि विक्रम संवत सूर्य और चंद्र दोनों ही की गतियों पर आधारित सबसे सटीक कैलेंडर है, जिसमें 12 मास हैं और ग्रहों पर आधारित सात दिनों के सप्ताह की गणना की देन भी यही प्राचीन कैलेंडर है।
दक्षिण में कार्तिक मास से शुरू होता है विक्रम संवत
विक्रम संवत में वर्ष को सौर वर्ष और मास को चंद्रमास कहते हैं। यहां यह भी बताना जरूरी है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से सिर्फ उत्तर भारत में ही नया वर्ष शुरू होता है। दक्षिण भारत में विक्रम संवत का नया वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष से शुरू होता है।
इंडिया घराने से जुड़ा संदर्भ
विक्रमी संवत का संदर्भ सिंधिया घराने से जुड़ा हुआ है। बीती शताब्दी में जब विक्रम संवत के 2000 वर्ष पूरे हुए थे तब देश भर में इस मौके पर खास कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। ईस्वी वर्ष के मुताबिक यह मौका साल 1944 में आया था। तब ग्वालियर के महाराजा जीवाजी राव सिंधिया ने विक्रम उत्सव मनाने की घोषणा की थी। उनकी ही पहल पर विक्रम स्मृति ग्रंथ प्रकाशित किया गया था। पंडित सूर्यनारायण व्यास ने इसका संपादन किया था। राजा विक्रमादित्य, कालिदास और उज्जैनी नगरी पर यह सबसे प्रमाणिक पुस्तक मानी जाती है।
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