झारखंडः ..और 21,243,438,000 खर्च किये जायें, तो वृद्धा, विधवा व दिव्यांगों का होगा समावेशी विकास [Jharkhand: ..and if 21,243,438,000 are spent, then there will be inclusive development of old people, widows and disabled people]

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रांची। झारखंड में मंईयां सम्मान योजना की तर्ज पर वृद्धा, विधवा और दिव्यागों को भी 2500 रुपये दिये जाने की मांग तेज हो गई है। फिलहाल वृद्धा, विधवा और दिव्यांगों को 1000 रुपये प्रतिमाह पेंशन दिया जा रहा है।

इस 1000 रुपये की राशि को बढ़ाकर 2500 करने की मांग को लेकर झारखंड विधानसभा में गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ। हंगामा इतना बढ़ा कि वपक्ष सदन से बहर निकल गया, यानी बीजेपी के तमाम विधायक वाकआउट कर गये। बीजेपी विधायकों का तर्क था कि मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना (Maiya Samman Yojana) के तहत 18 वर्ष से 50 वर्ष की महिलाओं को प्रतिमाह 2500 रुपये दिए जा रहे हैं तो विधवाओं, दिव्यांग महिलाओं तथा वृद्ध महिला को क्यों नहीं?

यह भी सवाल उठाया कि सहिया और स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाली महिला रसोइया को इतनी राशि क्यों नहीं मिल रही? विधवाओं, दिव्यांगों तथा वृद्धों को भी 2500 रुपये देने की मांग को लेकर भाजपा विधायकों ने जम कर बवाल काटा।

भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से यह सवाल उठाते कि सामाजिक सुरक्षा के तहत मिलनेवाली विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन तथा दिव्यांग पेंशन की राशि भी एक हजार रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये की जाये।

‘महिला रसोइया का मानदेय बढ़ाया गया’..

इस पर प्रभारी मंत्री चमरा लिंडा ने स्वीकार किया कि 28,5008 विधवा महिलाओं तथा 72,657 दिव्यांगों को एक हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन के रूप में दिए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि महिला रसोइया का मानदेय दो हजार रुपये है, जिसे बढ़ाकर तीन हजार रुपये कर दिया गया है, जबकि सहिया को प्रतिमाह 2000 रुपये मानदेय के अलावा 3000 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

कांग्रेस विधायक ने भी उठाया सवालः

बीजेपी विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि महिला रसोइया खाना बनाकर 2000 रुपये प्राप्त करती है, तो इससे अच्छा है कि वह बिना खाना बनाए ढाई हजार रुपये लें। सत्ता पक्ष से ही कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव ने भी इसपर सवाल उठाते हुए कहा कि मंईयां सम्मान योजना में बिना कोई काम लिए ढाई हजार रुपये दिए जा रहे हैं तो काम करने पर दो या तीन हजार रुपये क्यों? उन्होंने इसपर सरकार से विचार करने का अनुरोध किया।

भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार से साफ-साफ पूछा कि सरकार मंईयां सम्मान की तरह 2500 रुपये विधवा व दिव्यांग महिलाओं को देना चाहती है या नहीं? इसपर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने जवाब दिया कि केंद्र तथा राज्य सरकारें अपने संसाधनों के आधार पर योजनाएं बनाती हैं। विपक्ष की जो चिंता है, वह सरकार की भी चिंता है।

राज्य सरकार ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिमी बंगाल आदि पड़ोसी राज्यों में लागू व्यवस्था का अध्ययन कर विधवा, दिव्यांग तथा वृद्ध महिलाओं को भी 2500 रुपये पेंशन देने पर विचार करेगी। राज्य सरकार द्वारा इसकी स्पष्ट घोषणा नहीं किए जाने पर भाजपा विधायक नीरा यादव ने कहा कि विधवा, दिव्यांग तथा वृद्धा से राज्य सरकार की क्या दुश्मनी है?
जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि कोई बड़ा निर्णय लेने को लेकर विचार करने में समय लगता है।

क्या हैं योजनाएं और कितना होगा खर्चः

बताते चलें कि झारखंड में वृद्धा, विधवा और दिव्यांगों के लिए पेंशन योजना लागू हैं। इन तीनों योजनाओं के लाभुकों को प्रतिमाह 1000 रुपये दिये जाते हैं। इन तीनों योजनाओं में लाभुकों की कुल संख्या 11 लाख 80 हजार 191 है। यानी प्रतिमाह इन योजनाओं पर करीब 118 करोड़ 01 लाख 91 हजार खर्च किये जाते हैं।

फिलहाल केंद्र सरकार इस राशि का 30 प्रतिशत वहन करती है, यानी केंद्रांश राज्य सरकार को मिलता है। परंतु राज्य सरकार द्वारा यह राशि बढ़ाये जाने की स्थिति में यह केंद्र सरकार पर निर्भर करता है कि वह केंद्रांश बढ़ाये या नहीं, जो कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में बिलकुल ही संभव नहीं लगता।

और कितनी राशि की जरूरत प़ड़ेगीः

जैसा कि हम पहले बता चुके हैं कि राज्य में वृद्धा, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन के लाभुकों की संख्या करीब 11 लाख 80 हजार 191 है। ऐसे में यदि इन्हें मिलनेवाले 1000 रुपये को बढ़ाकर 2500 रुपये किये जाते हैं, तो प्रतिमाह अतिरिक्त 177 करोड़ 02 लाख 86 हजार 500 रुपये की व्यवस्था करनी होगी। सालाना की बात करें, तो हर साल करीब 2124 करोड़ 34 लाख 38 हजार रुपये की अतिरक्त जरूरत होगी।

इन तीनों पेंशन मद में 1500 बढ़े, तो प्रतिमाह 295 करोड़ 04 लाख 77 हजार 500 रुपये खर्च होंगी और साल में 3540 करोड़ 57 लाख 30 हजार रुपये खर्च होंगे। निश्चित ही 1 लाख 45 हजार करोड़ के बजट वाले राज्य के लिए यह बड़ी धन राशि है पर मंईयां सम्मान योजना पर खर्च हो रही राशि से तो ये कम ही है, जिसके लिए करीब 63 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

जानिये क्या हैं तीनों योजनाएं और कितने हैं लाभुकः

वृद्धा पेंशन योजनाः

झारखंड में इस योजना के तहत 9 लाख 02 हजार 998 लाभुकों को प्रतिमाह 1000 रुपये मिलते हैं। योजना के तहत 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और 60 वर्ष से अधिक की उम्र के बीपीएल कोटि के वृद्धों को 1000 रुपये की राशि दी जाती है।

विधवा पेंशन योजनाः

इस योजना के तहत राज्य में कुल 2 लाख 51 हजार 780 लाभुक निबंधित हैं। योजना के तहत 40 वर्ष से अधिक उम्र की विधवा को प्रतिमाह 1000 रुपये पेंशन दी जाती हैं। योजना का लाभ पाने के लिए विधवा महिला का बीपीएल श्रेणी का होना अनिवार्य है।

दिव्यांग पेंशन योजनाः

इस योजना के तहत राज्य के कुल 25,413 लाभुकों को प्रतिमाह 1000 रुपये पेंशन दी जाती है। इस योजना का लाभ लेनेवाले लाभुक का बीपीएल श्रेणी का होना अनिवार्य है।

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