यशस्विनी रेस, संजय सेठ की बढ़ी मुश्किल

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रांची। रांची लोकसभा चुनाव में भी अब रंग जमने लगा है। इंडी गठबंधन की ओर से कांग्रेस की य़ुवा प्रत्याशी यशस्विनी सहाय के नामांकन के बाद से यह रंग जमा है।

युवा महिला वकील यशस्विनी पर्चा दाखिल करने के बाद से ही रेस में हैं। उनकी इस स्पीड और सक्रियता ने रांची के मौजूदा सांसद और बीजेपी प्रत्याशी संजय सेठ की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

बताते चलें कि दो मई को अपने नामांकन के पूर्व संजय सेठ ने बयान दिया था कि यशस्विनी सहाय को टिकट देकर कांग्रेस ने उनके लिए खुला मैदान छोड़ दिया है।

अब तो उनके रास्ते में कोई बाधा ही नहीं है। परंतु जल्द ही समीकरण बदलने लगे। नामांकन से पहले ही यशस्विनी सहाय ने यह बता दिया कि उनकी उम्र कम है, अनुभव कम है, पर वह पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय की बेटी हैं।

राजनीति उनके खून में है। यह उनकी सक्रियता और तेजी ही थी कि नामांकन से पहले ही लोग उन्हें जानने लगे।

नामांकन का दिन आते-आते यशस्विनी सहाय के नाम के आगे से उनके पिता सुबोधकांत सहाय के नाम का टैग हट चुका था।

लोग सिर्फ यशस्विनी सहाय के नाम से उन्हें जानने और पुकारने लगे। नामांकन से पहले ही वह लोगों से मिलने जुलने लगीं।

इस दौरान उन्होंने सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट के वकीलों से मुलाकात की। फिर एचइसी के विभिन्न मजदूर संगठनों से मिलकर उनकी समस्याओं को दूर करने का आश्वासन दिया।

इतना ही नहीं वह जिस बिरादरी से आती हैं यानी कायस्थ, इस समाज के लोग भी उनके समर्थन में एकजुट होते दिख रहे हैं।

सबसे बड़ी बात की यशस्विनी सहाय युवा हैं। इसलिए वह अपनी सक्रियता से जल्द ही युवाओं के बीच लोकप्रिय भी होने लगी हैं।

एक युवती होने के कारण वह महिलाओं और युवतियों के बीच होनेवाली चर्चा के केंद्र में भी हैं। युवा होना और युवती होना भी उनके लिए एक प्लस प्वाइंट ही माना जा सकता है।

इसके कारण महिलाओं और युवतियों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ी है। वहीं बात करें उनके तेवर की, तो ये भी किसी माहिर राजनीतिज्ञ से कम नहीं दिखते।

अपने भाषण और इंटरव्यू में वह लगातार केंद्र सरकार और बीजेपी पर हमलावर नजर आती हैं।

उनका एक बयान वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मार्केटिंग..तो अच्छी है और प्रोडक्ट बेकार है..।

इसके अलावा उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई और युवाओं के मुद्दों को अपना हथियार बनाया है। ये मुद्दे भी उन्हें युवाओं से कनेक्ट कर रहे हैं।

एक सुबह अचानक ही वह मोरहाबादी मैदान में मार्निंग वाकर्स के बीच पहुंच गईं। यहां उनके परेशानी जानी और उनका दुख दर्द साझा किया।

बता दें कि मार्निंग वाकर्स में हर उम्र और तबके के लोग शामिल थे। उन्होंने अपनी समस्याएं भी यशस्विनी के साथ साझा कीं।

इसके अगले ही दिन वह ईचगढ़ में थी, जहां जंगल और गांवों में आदिवासियों तथा ग्रामीणों के साथ उन्होंने समय गुजारा।

प्रतिदिन शाम को वह रांची के कालोनी और मुहल्लों में लोगों से मिल रही हैं। यशस्विनी को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी उत्साह दिख रहा है। वे पूरे जोशो खरोश के साथ यशस्विनी के प्रचार में जुटे हैं।

दरअसल, यशस्विनी सहाय पहले से ही समाज सेवा से जुड़ी हुई हैं। वह स्वयंसेवी संगठन से जुड़ बच्चों के हक के लिए काम कर रही हैं।

पढ़ाई के दौरान ही सामाजसेवा में भी जुड़ गई थीं। वह गैर सरकारी स्वयंसेवी संस्था कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन से जुड़ी हैं।

झारखंड में बाल श्रम, यौन शोषण की रोकथाम और पॉक्सो एक्ट के सफल कार्यान्वयन के लिए काम कर रही हैं।

बच्चों के हक और अधिकार के लिए विभिन्न कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेती रहती हैं। यशस्विनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद यशस्विनी ने मुंबई से बैचलर ऑफ लॉ की डिग्री हासिल की।

स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने मुंबई से एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई की। इसके बाद ट्रांस्रेशनल क्राइम एंड जस्टिस, यूनाइटेड नेशंस क्राइम एंड जस्टिस रिसर्च इंस्टीट्यूट टुरिन, इटली से लॉ में मास्टर डिग्री हासिल की।

अभी वह मुंबई के फैमिली एवं सेशन कोर्ट में वकालत कर रही हैं। यशस्विनी का फिल्मी बैकग्राउंड भी है।

उनकी मां रेखा सहाय भी प्रख्यात टीवी कलाकार रह चुकी हैं। बताते चलें कि रांची से कांग्रेस का टिकट की रेस में कई नेता थे, जिसमें पांच बार के सांसद रामटहल चौधरी भी शामिल थे, लेकिन पार्टी ने रांची में नया दांव खेलकर बड़ा प्रयोग किया है।

रांची सीट से तीन बार सांसद रह चुके सुबोधकांत सहाय की बेटी यशस्विनी सहाय भी पार्टी के भरोसे पर खरी उतरती दिख रही हैं।

निश्चित ही यशस्विनी की बढ़ती लोकप्रियता और उनकी सक्रियता बीजेपी प्रत्याशी संजय सेठ की उस राह को मुश्किल बना रही है, जो पहले उन्हें खुला मैदान दिख रहा था।

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