रांची: लोकसभा चुनाव 2024 में अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले लोबिन हेम्ब्रम पूरी तरह बागी हो गए हैं। लोबिन हेम्ब्रम राजमहल से जेएमएम उम्मीदवार विजय हांसदा के खिलाफ चुनाव लड़ गए थे।
हालांकि उनके बागी होने से चुनावी परिणाम में बहुत अंतर नहीं आया। लोबिन हेम्ब्रम चुनाव में मात्र 42 हजार 140 वोट ही ला पाए थे। वहीं राजमहल में जेएमएम और बीजेपी के बीच जीत और हार का अंतर डेढ़ लाख से भी अधिक था। लेकिन इस बागी तेवर का खामियाजा लोबिन हेम्ब्रम को अपनी विधायकी खो कर चुकाना पड़ा।
जेएमएम उन्हें पहले ही पार्टी से छह साल के लिए निकाल चुकी थी और अब पार्टी की शिकायत पर विधानसभा अध्यक्ष ने दल बदल के मामले में उनकी विधायकी भी खत्म कर दी है।
इससे नाराज लोबिन हेम्ब्रम के सुर भाजपा से मिलने लगे हैं। वैसे तो वे पहले भी हेमंत सरकार के खिलाफ नियोजन नीति, नौकरी, पेसा कानून लागू करने जैसे मुद्दों पर बोल चुके हैं। लेकिन अब वे संथाल में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ पर भी हेमंत सरकार को घेरते हुए नजर आ रहे हैं।
लोबिन हेम्ब्रम ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि संथाल में आदिवासियों की जमीन लूटी जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि जेएमएम और कांग्रेस गठबंधन संथाल में वोट बैंक के लिये बांग्लादेशियों को पनाह दे रही है।
विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संथाल में चल रहे बांग्लादेशी घुसपैठ को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना रही है। चुनावी रैलियां हों या संसद या फिर झारखंड विधानसभा, भाजपा ने हर मंच पर इस मुद्दे को उठाया है। लोकसभा चुनाव में तो प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस मुद्दे को अपनी आवाज दी थी।
गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने तो संथाल में बांग्लादेशी घुसपैठ को भारत और झारखंड की आंतरिक सुरक्षा से जोड़ते हुए इस हिस्से को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग कर दी है। लोबिन हेम्ब्रम जेएमएम के पुराने नेताओं में से एक हैं।
उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की छाया में की है। अब अगर वे संथाल में बांग्लादेशी घुसपैठ की बात करेंगे तो जाहिर है इससे भाजपा को बल मिलेगा।
हालांकि एक प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने जब लोबिन हेम्ब्रम से पुछा कि क्या वे भविष्य में भाजपा का दामन पकड़ सकते हैं तो उन्होंने इस बात से मना कर दिया। जब उनसे आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अभी वे चुनाव लड़ने के लिये सक्षम हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव में जरूर मैदान में उतरेंगे।
हालांकि लोबिन हेम्ब्रम इस बात से भी नाराज हैं कि बिशुनपुर से जेएमएम विधायक चमरा लिंडा भी लोकसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ बगावत कर चुके हैं। वे भी इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी सुखदेव भगत के खिलाफ लोहरदगा संसदीय सीट से चुनाव लड़े थे। लेकिन उनकी विधायकी नहीं गयी।
संथाल में लोबिन हेम्ब्रम से पहले जामा से पूर्व विधायक और हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन भी जेएमएम से बागी हो चुकी हैं। अब वे भाजपा में हैं। लोबिन हेम्ब्रम भले ही भाजपा में ना मिले हों, लेकिन उनके सुर भाजपा से जरूर मिलने लगे हैं।
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