होटल अशोका के कर्मचारी क्यों करना चाहते हैं आत्मदाह [Why do Hotel Ashoka employees want to commit suicide?]

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रांची। रांची के डोरंडा स्थित होटल अशोका के 5 कर्मचारियों ने सामूहिक रुप से आत्मदाह करने का फरमान जारी किया है। कर्मचारियों ने कहा है कि 15 अगस्त के दिन वह सामूहिक रूप से आत्मदाह करेंगे।

इसको लेकर उन्होंने पीएम मोदी, राष्ट्रपति, सीएम, राज्य सरकार के कई आला अधिकारियों को इमेल के जरिए संदेश भेजा है और कहा है कि 15 अगस्त को दोपहर के 2 बजे होटल परिसर में सभी आत्मदाह कर लेंगे। जो कर्मी आत्मदाह करेंगे, उनमें पंकज कुमार, दीपक कुमार सहाय, ओमप्रकाश, बिरेंद्र प्रसाद ठाकुर, सुरेंद्रलाल शर्मा और जीतू सिंह शामिल हैं।

खाने तक के लाले पड़ गये हैं

दरअसल, शहर के पॉश इलाके डोरंडा स्थित होटल अशोक करीब छह साल से बंद पड़ा हुआ है। ऐसे में यहां पर काम करने वाले कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने से उनकी स्थिति दयनीय हो चुकी है। कर्मचारियों का कहना है कि 25 माह से वेतन नहीं मिलने से उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। दो जून की रोटी को मोहताज हैं।

आर्थिक तंगी के कारण परिवार के साथ समाज में भी उनका जीना मुश्किल हो गया है। बच्चों का भविष्य भी बर्बाद हो रहा है। उनकी शादी नहीं हो पा रही है। मोहल्ले वाले पैसे मांगने के डर से उनसे नजरें चुरा रहे हैं। ऐसे में उनके समक्ष आत्मदाह ही एक मात्र रास्ता बचा है।

क्या लिखा है मेल में

केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों को भेजे गये ईमेल में लिखा है कि सर्वप्रथम समस्त सम्मानीय देवतुल्य वरिष्ठजनों आपको हम रांची, झारखंड स्थित भारत पर्यटन विकास निगम व बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के संयुक्त उपक्रम होटल रांची अशोक के कर्मचारी श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं।

मेरे सम्मानीय देवतुल्य वरिष्ठजनों आप चाहते हैं कि बचे सारे कर्मचारी नौकरी छोड़ दें या सभी की मौत हो जाये, ताकि आप अपनी इच्छा के अनुरूप डील कर सकें। हमने आपकी इच्छा का सम्मान करते हुए 15 अगस्त को दोपहर 2 बजे होटल परिसर के समक्ष आत्मदाह करने का निर्णय लिया है. लेकिन हम जब तक जिंदा रहेंगे, आपको हर दिन पत्र लिखते रहेंगे।

ईमेल में लिखा है कि यह हमारी तरफ से आपको लगातार 29वां दिन, 29वां पत्र दिया जा रहा है। लेकिन आप अपने खेल पे कायम हैं कि कर्मचारियों के रहते होटल हस्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं करनी है।

अब हम भी अपने निर्णय पे कायम है कि 15 अगस्त को देश के स्वतंत्रता दिवस के दिन हम अपने शरीर को आपकी तरफ से दिये जा रहे पीड़ा से स्वतंत्र करेंगे। आगे लिखा है कि इस दुनियां से खुद को स्वतंत्र करेंगे। हम आपकी खुशी के लिए खुद के शरीर का त्याग करेंगे। हमारी ना सही, आपकी इच्छा तो पूरी होगी. केंद्रीय कैबिनेट के नाम पर हो रहे खेल को बंद किया जाना चाहिए।

हम समझ रहे हैं कि झारखंड सरकार और बिहार सरकार दोनों केंद्र सरकार को खेल खेलने में मदद कर रही है। इस खेल में तीनों सरकार बराबर की जिम्मेदार है. इसलिए निवेदन है कि यह बहाना बंद करें। पिछले चार बर्षों से एक ही बहाना कर हमें धोखे में रखा रहा है।

निवेदन है कि हमें रोकने का प्रयास ना करें, क्योंकि आपकी प्रताड़ना झेलने से बेहतर मौत है और हम अपने निर्णय पे अडिग हैं।

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