रांची। झारखंड की टाप ब्यूरोक्रेसी में फेरबदल क्या संकेत दे रहे हैं। सियासी गलियारे में यह सवाल आज तेजी से तैर रहा है।
आइए इन सारे तबादलों के पीछे की इनसाइड स्टोरी जानने की कोशिश करते हैं।
सीएम चंपाई सोरेन ने बड़ा फैसला लेते हुए 8 बड़े आईएएस अफसरों को बदल दिया है। विनय कुमार चौबे को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव पद से हटा दिया गया। उन्हें पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव पद पर भेजा गया है।
वहीं, ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार को सीएम के अपर मुख्य सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। अविनाश कुमार के पूर्व प्रभार पर यथावत रहेंगे।
अन्य महत्वपूर्ण फैसले में मुख्यमंत्री के सचिव अरवा राजकमल को गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
अजय कुमार सिंह का ट्रांसफर ग्रामीण कार्य विभाग से स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव पद पर किया गया है।
अजय पहले ग्रामीण के साथ स्वास्थ्य विभाग भी देख रहे थे। अबुबकर सिद्दीकी को कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग से खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव पद पर स्थानांतरित किया गया है।
उनके पास कृषि सचिव के साथ खान एवं भूतत्व का अतिरिक्त प्रभार था। वहीं, जितेंद्र कुमार सिंह को उद्योग से कृषि विभाग में स्थानांतरित किया गया है।
बता दें कि विनय कुमार चौबे ने हेंमत सोरेन के मुख्यमंत्री का पद छोड़ते ही सीएम के प्रधान सचिव का पद खुद ही छोड़ दिया था।
फिर चंपाई सोरेन के मुख्यमंत्री का पदभार संभालते ही उन्हें वापस लाया गया और फिर सीएम के प्रधान सचिव के पद से हटा दिया गया।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव पद से विनय चौबे को हटाने और अविनाश कुमार को अपर मुख्य सचिव बनाए जाने को बड़े फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल, सरकार सीएमओ में एक समझदार और तेजतर्रार अधिकारी की जरूरत महसूस कर रही थी, इसलिए अविनाश पहली पसंद बने।
वहीं, विनय चौबे को हटाने के पीछे एक मार्च को धनबाद डीसी के पद से वरुण रंजन को हटाकर माधवी मिश्रा को डीसी बनाए जाने की घटना को बड़ा कारण बताया जा रहा है।
हालांकि पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद से उनकी सोच, योजना और विजन को सरकार में लागू कराना और जमीन पर उतारने में विनय चौबे की प्रभावी भूमिका रही थी।
लेकिन, सीएम चंपाई सोरेन ने 26 फरवरी को विनय चौबे के रहते हुए भी अरवा राजकमल को अपना सचिव नियुक्त कर लिया।
इस फैसले से विनय चौबे सीएम के प्रधान सचिव और अरवा राजकमल सीएम के सचिव हो गए। इतना ही, नहीं अरवा राजकमल को वे सारे प्रभार भी दे दिए गए, जो विनय चौबे के पास थे।
बताया जा रहा है कि उसी समय से सीएमओ में अरवा राजकमल के प्रभाव बढ़ गया है। अरवा राजकमल पहले सरायकेला-खरसावां और चाईबासा के डीसी रह चुके हैं।
सरायकेला-खरसावां मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन का गृह जिला है। उसी समय से चंपाई सोरेन का अरवा राजकमल पर विश्वास जम गया था।
इसलिए, जब चंपाई सीएम बने तो उन्होंने अरवा राजकमल को अपनी कोर टीम में शामिल कर लिया। उन्होंने कई अन्य फैसलों में संकेत दिया है कि वह अपनी समझ और सूझबूझ से निर्णय ले रहे हैं।
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