एडीएम रैंक के इन अधिकारियों के खिलाफ कल जारी हो सकता है वारंट

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रांची। झारखंड के 20 एडीएम रैंक के अधिकारियों और 17 अन्य सेवाओं से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कल यानी 8 मई को वारंट जारी हो सकता है।

इन 20 अधिकारियों में एक आईएएस और एक आईपीएस रैंक में प्रोन्नत हो चुके हैं। दरअसल, ये कार्रवाई जेपीएससी के बहुचर्चित मेधा घोटाले में हो सकती है।

इस मेधा घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने जेपीएससी संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा प्रथम और द्वितीय के 55 अधिकारियों की नियुक्ति को गलत पाया है।

इन पर गलत ढंग से परीक्षा में सफल होने का आरोप था, जिसे सीबीआई ने जांच में सही पाया है।

इनमें जेपीएससी प्रथम के 20 और द्वितीय के 35 अधिकारी हैं। जांच पूरी होने के बाद दो साल पहले सीबीआई ने इन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दायर करने की अनुमति मांगी थी।

अब सीबीआई ने जेपीएससी फर्स्ट के कुल 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दिया है। इनमें से 20 नियुक्त एडीएम स्तर के पदाधिकारी हैं।

बता दें कि सीबीआई ने जेपीएससी प्रथम के 62 और द्वितीय के 172 अधिकारियों की नियुक्ति की जांच शुरू की थी।

जेपीएससी प्रथम में सफल दो अधिकारियों का यूपीएससी की परीक्षा में सफल होने पर आईपीएस और आईआरएस कैडर में चयन हो चुका है।

इसके बाद 62 अधिकारियों की जांच की गई, जिनमें 20 अधिकारियों के गलत ढंग से परीक्षा में सफल होने की पुष्टि हुई।

इसी तरह जेपीएससी द्वितीय में भी 35 अधिकारियों ने गलत ढंग से सफलता पाई।

ये गड़बड़ियां आईं थी सामनेः

• कई अभ्यर्थियों ने उत्तर पुस्तिका में कुछ भी नहीं लिखा और नंबर दे दिए गये।

• कई उत्तर पुस्तिकाओँ में अंदर नंबर कुछ और थे, मुख्य पृष्ठ पर कुछ और नंबर।

• कुछ अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के मुख्य पृष्ठ पर 33 नंबर को 88 नंबर कर दिया गया।

• कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में सवालों के जवाब गलत थे, लेकिन पूरे नंबर दिए गये।

सीबीआई उन परीक्षकों के खिलाफ भी जांच कर रही है जिन्होने नंबर देने में गड़बड़ी की है।

सीबीआई ने उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन भी कराया है। इसमें पूर्व और वर्तमान परीक्षकों द्वारा दिए गए नंबर में भारी असमानता पाई गई।

अब सीबीआई पहले के परीक्षकों से पूछताछ कर रही है। उनसे यह जानने की कशिश कर रही है कि उन्होंने किस दबाव में ज्यादा नंबर दिया था। दोषी पाए गए ऐसे परीक्षकों के खिलाफ अलग से चार्जशीट दायर होगी।

रांची सिविल कोर्ट के सीनियर एडवोकेट डा प्रकाश झा बताते हैं कि सीबीआई के चार्जशीट दायर करने के बाद कोर्ट इस बात का संज्ञान लेगी की ये मामला सुनवाई योग्य है या नहीं।

अगर न्यायालय को लगा कि सीबीआई की चार्जशीट में सुनवाई योग्य पर्याप्त साक्ष्य हैं, तो न्यायालय सभी अभियुक्तों को हाजिर होने के लिए समन भेजेगी।

समन के बाद अभियुक्त या तो कोर्ट के सामने सरेंडर करेंगे या फिर एंटीसिपेटरी बेल लेकर कोर्ट के सामने हाजिर होंगे।

चार्जशीट में नामजद सभी अभियुक्तों के हाजिर होने के बाद ही न्यायालय मामले को आगे बढ़ाएगी और सभी अभियुक्तों को पुलिस पेपर दिया जाएगा।

इसके बाद अभियुक्त चार्जशीट से अपना नाम हटाने के लिए कोर्ट में अर्जी दे सकते हैं। अगर कोर्ट ने अर्जी मान ली तो उनका नाम चार्जशीट से हट सकता है।

अर्जी खारिज होने के बाद सभी अभियुक्तों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किया जाएगा और कोर्ट ट्रायल शुरु होगा।

अब आपको बताते हैं कि प्रथम बैच के किन अधिकारियों को सीबीआई ने दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ चार्जशीट फाइल किया है।

इन अधिकारियों में.. कुमारी गीतांजलि, विनोद राम, मौसमी नागेश, रजनीश कुमार, कुंदन कुमार, मुकेश कुमार महतो, राधा प्रेम किशोर, कानू राम नाग, श्वेता वर्मा, रंजीत लोहरा, लक्ष्मी नारायण किशोर और अन्य शामिल हैं।

बताते चलें कि जेपीएससी प्रथम का 2004 में और द्वितीय का 2008 में रिजल्ट जारी हुआ था।

दोनों परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे तो सरकार ने निगरानी को जांच का जिम्मा सौपा। इसी बीच हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की मांग को लेकर पीआईएल दायर की गई।

हाईकोर्ट के तत्कालीन जस्टिस एनएन तिवारी ने 2012 में प्रथम बैच के 20 अधिकारियों के वेतन पर रोक लगाते हुए सरकार को उनसे काम लेने से मना कर दिया।

इसके विरोध में एक अभ्यर्थी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए सीबीआई जांच के आदेश को स्थगित करते हुए याचिकाकर्ता को काम पर रखने और वेतन देने का निर्देश दिया।

इसके बाद सभी 20 अधिकारियों को पद पर बहाल रखा गया और जांच बंद हो गई। वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने फिर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की तो सुप्रीम कोर्ट ने फिर सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी। तब से सीबीआई मामले की जांच कर रही है।

चार्जशीट दायर होने के बाद दोषी अफसरो के खिलाफ कोर्ट से वारंट जारी होगा। वारंट जारी होते ही उनके निलंबन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

2019 में प्रशासनिक सेवा के पहले बैच के अधिकारियों की दी गई प्रोन्नति भी वापस ली जा सकती है।

अंतिम कार्रवाई कोर्ट के अंतिम फैसले से प्रभावित होगी। दोषी पाए जाने पर मेरिट लिस्ट में उनसे नीचे रहे अधिकारी ऊपर जाने की मांग कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें कोर्ट जाना होगा।

बता दें कि सीबीआई ने जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष डा. दिलीप प्रसाद, तत्कालीन वरीय सदस्य गोपाल प्रसाद सिंह, सदस्य राधा गोविंद सिंह नागेश, शांति देवी, परीक्षा नियंत्रक एलिस उषा रानी के अलावा अपर समाहर्ता रैंक के अधिकारी सहित 37 के खिलाफ जांच पूरी करते हुए चार्जशीट दाखिल की है।

सीबीआई ने दो जेलर और डीटीओ पर भी चार्जशीट दाखिल किया है। चार्जशीट में 25 से 30 ऐसे आरोपित हैं, जो जेपीएससी की परीक्षा में फर्जीवाड़ा कर अफसर बने हुए हैं।

सीबीआई ने इस मामले में करीब 12 साल बाद चार्जशीट दाखिल की है। मामले में अब अदालत आठ मई को चार्जशीट पर संज्ञान ले सकती है।

संज्ञान लेने के बाद चार्जशीटेड आरोपितों के खिलाफ समन जारी किया जाएगा।

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