Elephant tracking system
हजारीबाग। झारखंड में पहली बार किसी हाथी के गले में रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी की गई है। झारखंड वन विभाग ने हजारीबाग में एक आक्रामक हथिनी की निगरानी के लिए अत्याधुनिक रेडियो कॉलर मंगवाया है। हाल ही में इसी हथिनी ने चुरचू प्रखंड के गोंदवार क्षेत्र में 24 घंटे के भीतर सात लोगों को कुचलकर मार डाला था, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पांच हाथियों के एक झुंड में शामिल यह हथिनी बेहद आक्रामक व्यवहार कर रही है और कई बार आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर चुकी है। इसी को देखते हुए उसके गले में रेडियो कॉलर लगाने का निर्णय लिया गया है, ताकि उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
500 मीटर पहले मिलेगा संकेत
अधिकारियों ने बताया कि यह रेडियो कॉलर साधारण नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा। जैसे ही कॉलर पहने हाथी आबादी से 500 मीटर की दूरी पर पहुंचेगा, वन विभाग को अलर्ट मिल जाएगा। इससे किसी संभावित अनहोनी से पहले ही प्रशासन और स्थानीय लोगों को सतर्क किया जा सकेगा।
यह सिस्टम एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन से जुड़ा होगा, जिससे वनकर्मियों को रीयल टाइम लोकेशन मिलती रहेगी। अब तक उपयोग किए जा रहे कॉलर मुख्यतः सैटेलाइट आधारित थे, लेकिन यह नई तकनीक ज्यादा सटीक और त्वरित सूचना देने में सक्षम बताई जा रही है।
मानव-हाथी संघर्ष पर नियंत्रण की कोशिश
मानव और हाथियों के बीच संघर्ष कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में झारखंड में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। 2024 की गणना के अनुसार राज्य में करीब 680 हाथी हैं। हजारीबाग क्षेत्र में चार से पांच हाथियों का समूह सक्रिय है, जो सतगांवा, सिमरिया और बरकट्ठा इलाकों में देखा जाता है।
कई बार हाथी भोजन की तलाश में गांवों में घुस आते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान होता है।वन विभाग का मानना है कि रेडियो कॉलर के जरिए न सिर्फ लोगों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि हाथियों को भी भीड़ के हमले से बचाया जा सकेगा। हालांकि, किसी जंगली हथिनी को बेहोश कर उसके गले में कॉलर लगाना आसान काम नहीं है। इसके लिए विशेषज्ञ टीम और विशेष रणनीति की जरूरत होगी।
अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से भविष्य में अन्य संवेदनशील इलाकों में भी ऐसी तकनीक अपनाई जा सकती है। यह कदम मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।








