रांची : डुमरी उपचुनाव में इंडिया की प्रत्याशी बेबी देवी ने बाजी मार ली है। 24वें राउंड की मतगणना के बाद बेबी देवी ने एनडीए प्रत्याशी यशोदा देवी को 17153 मतों से हरा दिया। चुनाव में बेबी देवी को 100317 मत मिले वहीं यशोदा देवी को 83164 मत मिले। यहां यह बताना भी जरूरी है कि इस सीट पर 1967 के बाद से जीत हासिल करनेवाली बेबी देवी दूसरी महिला उम्मीदवार हैं। उनसे पहले इस सीट पर 1967 में राजा पार्टी की एस मंजरी विधायक बनीं थीं। एआइएमआइएम उम्मीदवार डुमरी उपचुनाव में तीसरे स्थान पर रहा। उसे 3472 वोट मिले। डुमरी उपचुनाव में मिले नतीजों का विश्लेषण करें तो यह साफ हो गया है कि बेबी देवी ने अपने पति का रिकार्ड तोड़ दिया है।
उन्होंने उपचुनाव में 100317 मत हासिल किए हैं जो बीते चुनाव में उनके पति जगरनाथ महतो को मिले वोटों से 29189 ज्यादा हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव में विजेता झामुमो उम्मीदवार जगरनाथ महतो को 71,128 वोट मिले थे और आजसू की यशोदा देवी को 36,840 वोट आए थे। इस तरह डुमरी सीट पर एनडीए की सहयोगी पार्टी आजसू की यशोदा देवी करीब 34 हजार वोटों से पीछे रह गई थीं। वहीं भाजपा उम्मीदवार प्रदीप साहू को 36,013 वोट मिले थे। बीजेपी और आजसू के सम्मिलित वोट पिछली बार 72 हजार से अधिक थे। इंडिया उम्मीदवार बेबी देवी को मिली जीत के कारणों की बात करें तो उन्हें अपने पति के विरासत के साथ उनके निधन से उपजी सहानुभूति की लहर का भी फायदा मिला है। 2005 के बाद से जगरनाथ महतो इस क्षेत्र से झामुमो का झंडा लहरा रहे थे। 2005 के बाद लगातार 2019 तक वे इस सीट से जीत हासिल करते रहे।
इस उपचुनाव में बेबी देवी की जीत तय करने में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और इंडिया के घटक दलों की एकजुटता भी काम आयी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यहां न सिर्फ एक दर्जन से ज्यादा चुनावी सभाएं की बल्कि क्षेत्र के लोगों को करोड़ों की योजनाओं की सौगात दी। उन्होंने जगरनाथ महतो के नाम पर क्षेत्र के लोगों से वोट मांगे और उनकी यह अपील काम कर गयी। बेबी देवी की जीत में उनके बेटे राजू महतो की मेहनत का भी हाथ है।
राजू महतो ने अपनी मां के लिए चुनाव प्रचार का काम संभाला और हमेशा मां का मनोबल बढ़ाते रहे। मां बेबी देवी के लिए होनेवाली हर चुनावी सभा में वे उनके साथ रहे। उपचुनाव में एआइएमआइएम प्रत्याशी को मुस्लिम उम्मीदवारों का पूरा साथ नहीं मिला और ये वोट इंडिया उम्मीदवार के पक्ष में ट्रांसफर हो गये। उपचुनाव में एआईएमआईएम उम्मीदवार अब्दुल मोबिन रिजवी को केवल 3472 मतों से संतोष करना पड़ा जबकि बीते विधानसभा चुनाव में 24132 मत मिले थे। इस तरह बीते विधानसभा चुनाव की तुलना में इस दफा उन्हें 20660 मत कम मिले। ये वोट इंडिया उम्मीदवार के खाते में गये और इस तरह इंडिया प्रत्याशी ने चुनाव में एनडीए की लुटिया डूबो दी।
ये रहे एनडीए प्रत्याशी के हार के कारण
डुमरी उपचुनाव में 83164 वोट लाकर भी यशोदा देवी हार गयीं तो इसके पीछे एक नहीं कई कारण रहे। पहली वजह तो ये रही कि चुनाव में भाजपा का वोट पूरी तरह आजसू उम्मीदवार को ट्रांसफर नहीं हुआ। एनडीए उम्मीदवार को जिताने में बाबूलाल और रघुवर सरीखे राज्य स्तरीय नेताओं ने तो जोर लगाया पर भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उतनी मेहनत नहीं की।
एनडीए की डुमरी में हार की दूसरी वजह ये रही कि इंडिया की तुलना में एनडीए ने अपने प्रत्याशी की घोषणा अपेक्षाकृत देर से की। वहीं झामुमो ने बेबी देवी को मंत्री बनाने के साथ ही उन्हें प्रत्याशी घोषित कर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल कर ली थी। डुमरी सीट को झामुमो की परंपरागत सीट माना जाता है कि इस मानसिकता को एनडीए तोड़ नहीं सकी। हालांकि यशोदा देवी ने भी यहां अपने पति के दिवंगत होने और बेटे को कैंसर पीड़ित बताकर सहानुभूति का कार्ड खेलने की कोशिश की लेकिन उनका कार्ड नहीं चला। जनता ने उनकी अपील को नकार दिया।
उपचुनाव में इंडिया की जीत का आगे क्या असर होगा
डुमरी उपचुनाव में इंडिया प्रत्याशी बेबी देवी की जीत से इंडिया घटक दलों के नेताओ का मनोबल बढ़ा दिया है। 2019 के बाद से राज्य में छह उपचुनाव हुए हैं और इनमें से पांच में इंडिया ने जीत हासिल की है। डुमरी के अलावा दुमका, बेरमो, मांडर और मधुपुर में यूपीए को जीत हासिल हुई है जबकि सिर्फ एक सीट रामगढ़ पर एनडीए उम्मीदवार जीता है।
एनडीए पर इंडिया की पांच एक की बढ़त का 2024 में होनेवाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में असर दिखेगा। डुमरी उपचुनाव में ऐसा माना जा रहा था कि जगरनाथ महतो के बाद जयराम महतो कुरमियों के बड़े नेता के तौर पर उभरेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे जयराम महतो का असर घटेगा। चुनाव में एनडीए समर्थित आजसू उम्मीदवार की हार से सुदेश महतो का भाजपा पर दबाव भी कम होगा।
इसका असर 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में एनडीए के सीटों के बंटवारे में भी दिखेगा। इस उपचुनाव के नतीजों ने बतौर नेतृत्वकर्ता बाबूलाल मरांडी की साख पर भी असर डाला है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर डुमरी उपचुनाव उनकी पहली परीक्षा थी और इसमें वे असफल रहे हैं। इस उपचुनाव ने यह भी बता दिया है कि भाजपा और आजसू को 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों को लेकर रणनीति में बदलाव लाने की जरूरत है।








