रांची : आजसू पार्टी छोड़कर जदयू ज्वाइन करनेवाले प्रोफेसर विनय भरत ने पार्टी छोड़ने की अपनी वजह सोशल मीडिया में शेयर की है। उन्होंने कहा है कि आजसू पार्टी छोड़ना भावनात्मक तल पर मेरे निजी जीवन का यह अब तक का सबसे कठिन निर्णय रहा।
लेकिन चूंकि यूनिवर्सिटी युवाओं के बीच रहना ही मेरा पेशा है और देश ने उनको जिस हालात पर ला छोड़ा है, बेरोजगारी के कोख से उपजी हताशा ने उनके सोचने समझने की शक्ति को लीलना शुरू कर दिया है। केंद्र में जिन्हें हमने बैठाया ,उसकी ” बहुत हुआ बेरोजगारी की मार, अबकी बार मोदी सरकार” की हुंकार वक्त के साथ कहीं गुम हो गयी।
और देश कभी नोटबन्दी, कभी अनप्लांड लॉकडाउन ,कभी एनआरसी, कभी ड्रैकोनियन कृषि बिल, कभी यूसीसी जैसे खिलौने से खेलता रहा। केंद्र यह समझने में देर कर रहा है कि युवाओं को स्टैब्लिशमेंट से पहले हमारी गाढ़ी कमाई के टैक्स उगाही के पैसे के एवज में एक अदद नौकरी चाहिए।मुझे एक निर्णय पर पहुंचना था।सो, पहुंचा।
मुझे बेदाग छवि वाले विद्वान नेतृत्व नीतीश कुमार में देश के युवाओं की उम्मीद दिखती है और उनके विकास मॉडल से युवाओं को स्थायी समाधान दिखता है। मैं इस आगे की संघर्ष यात्रा के लिए प्रथम गुरु सुदेश महतो से आशीष चाहूंगा। उनका ऋणी हूं। रहूंगा। साथ में आप सभी गुरुजनों, साथियों का भी आशीष का अभिलाषी हूं।







