UGC rules controversy: यूजीसी नियमों पर सियासी संग्राम, दलित-ओबीसी समाज ने यूजीसी के समर्थन में निकाली रैली

Anjali Kumari
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UGC rules controversy

बोकारो। यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में जारी राजनीतिक बहस छिड़ गई है। इसी बीच बोकारो में दलित, आदिवासी और ओबीसी समाज ने इसके समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। मंगलवार को नया मोड़ स्थित बिरसा चौक पर बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने रैली निकालते हुए यूजीसी के नए प्रावधानों का समर्थन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया।

यूजीसी के समर्थन में जुटी बड़ी भीड़

रैली में शामिल लोगों ने कहा कि यूजीसी के नए नियम उच्च शिक्षा में समानता और सामाजिक न्याय को मजबूती देंगे। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था वर्षों से चले आ रहे भेदभाव को खत्म करने की दिशा में अहम कदम है और इससे वंचित समाज के छात्रों को आगे बढ़ने का वास्तविक अवसर मिलेगा।

‘भेदभाव पर करारा प्रहार है नया नियम’

वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी के नए नियम दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए शिक्षा के दरवाजे और चौड़े करेंगे। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला बताया।

सामंती सोच पर साधा निशाना

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कुछ सामंती सोच वाले लोग नहीं चाहते कि दलित, आदिवासी और ओबीसी समाज शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी हासिल करे। इसी कारण वे यूजीसी के नए नियमों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना कर रहे हैं।

पीएम मोदी को बताया ‘समानता का प्रहरी’

प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “समानता का प्रहरी” बताते हुए कहा कि उनकी सरकार में वंचित समाज को शिक्षा, सम्मान और अवसर मिला है। यूजीसी के नए नियम उसी सोच का परिणाम हैं।

‘यह लड़ाई सम्मान और बराबरी की है’

दलित-ओबीसी समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ की जा रही राजनीति को वे स्वीकार नहीं करेंगे। यह संघर्ष केवल नियमों का नहीं, बल्कि शिक्षा में सम्मान, अवसर और बराबरी की लड़ाई है। इस दौरान गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी ज्ञानेश्वर प्रसाद ने कहा कि यूजीसी के नए नियम सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम हैं। वहीं सहदेव साव ने कहा कि समानता से डरने वाले लोग ही इसका विरोध कर रहे हैं और दलित-ओबीसी समाज अब पीछे हटने वाला नहीं है।

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