बोकारो विधानसभा सीट पर कांग्रेस, भाजपा व जेएलकेएम में त्रिकोणीय संघर्ष [Triangular contest between Congress, BJP and JLKM on Bokaro assembly seat]

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बोकारो। बोकारो विधानसभा के 588 बूथों पर बुधवार को मतदान शांतिपूर्ण रहा। कांग्रेस से श्वेता सिंह, भाजपा से बिरंची नारायण और जेएलकेएम से सरोज देवी व अन्य 11 प्रत्याशी मैदान में हैं। जनादेश ईवीएम में कैद हो चुका है।

परिणाम 23 नवंबर को सामने आएगा। बोकारो विधानसभा क्षेत्र में 61 प्रतिशत मतदान हुआ। रुझानों में इस बार यहां त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिला।

जेएलकेएम की इंट्री ने चुनाव की दिशा को प्रभावित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बंपर मतदान हुआ, वहीं शहरी वोटर उदासीन दिखे। ग्रामीण क्षेत्रों में जेएलकेएम कांग्रेस को ज्यादा वोट पड़े हैं, वहीं शहरी क्षेत्र में कांग्रेस और बेजीपी में टक्कर दिखी। ग्रामीण क्षेत्रों मे जेएलकेएम हावी रहा।

बीजेपी के पास परांपरागत वोटर, मजबूत बूथ मनैजमेंट का एडवांटेज रहा, लेकिन लगातार दो बार इस सीट को जीतने वाले प्रत्याशी को एंटीइनकंबेंसी के कारण हानि हो सकती है। कांग्रेस की श्वेता सिंह 2014 चुनाव में 13 हजार वोटों से पीछे रह गई थीं, लेकिन इस बार कांग्रेस ने अपना होमवर्क कर अपने किले को मजबूत किया।

दो अल्पसंख्यक प्रत्याशियों का सर्मथन प्राप्त कर वोटों के बिखराव को रोका, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सघन प्रचार कर अपनी स्थिति मजबूत की। पार्टी सभी खेमे को एक रखने में कामयाब रही, जिसका असर मतदान के दिन दिखा।

वहीं, विधानसभा चुनाव में पहली बार उतरी जयराम महतो की पार्टी जेएलकेएम के पास खोने को कुछ नहीं है। जेएलकेएम का कुर्मी, राजवार व वैश्य वोटों पर पकड़ भाजपा व कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।

जेएलकेएम को इस चुनाव में ग्रामीण वोटरों का आशीर्वाद मिलता दिख रहा है। जेकेएलएम को मिले वोट बोकारो विधानसभा में प्रत्याशियों की जीत-हार तय करेंगे. जीत-हार का अंतर भी कम रहने का अनुमान है।

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