Indian Railway
रांची। भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। अब रांची औक हटिया से खुलनेवाली अधिकतर ट्रेनें बालसिरिंग से खुलेंगी। इसके लिए रांची रेल मंडल के बालसिरिंग स्टेशन के पास कोचिंग डिपो बनेगा। हटिया कोचिंग डिपो पर भार कम करने एवं भविष्य की ट्रेनों के लिए एक अत्याधुनिक कोचिंग डिपो विकसित करने के उद्देश्य से एक वैकल्पिक टर्मिनल विकसित किया जायेगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, हटिया से छह किलोमीटर दूर स्थित समीपवर्ती स्टेशन बालसिरिंग को चिह्नित किया गया है। सभी दक्षिण एवं पश्चिम दिशा की ट्रेनें हटिया या रांची के स्थान पर बलसिरिंग से प्रारंभ की जा सकती हैं।
वहीं, उत्तर दिशा की ट्रेनें बलसिरिंग से प्रारंभ होकर लोढ़मा-पिस्का बाइपास के वाइ-कनेक्शन से होते हुए टोरी लाइन के माध्यम से उत्तर भारत की ओर जायेगी। वैकल्पिक रूप से उत्तर एवं पूर्व दिशा की ट्रेनें बलसिरिंग से प्रारंभ होकर हटिया एवं रांची में यात्रियों के चढ़ने-उतरने के लिए लगभग 10-10 मिनट का ठहराव कर सकती हैं और तत्पश्चात अपनी आगे की यात्रा टाटीसिलवे-बरकाकाना, मुरी-बरकाकाना, मुरी-बोकारो अथवा मुरी-चांडिल मार्गों से विभिन्न रूट, दिशाओं, भौगोलिक क्षेत्रों एवं यात्री वर्गों की आवश्यकताओं के अनुरूप जारी रख सकती हैं।
कोचिंग यार्ड में परिचालन संबंधी सीमाएं तथा स्थान की कमी
रेलवे के अधिकारी ने बताया कि हटिया कोचिंग यार्ड में परिचालन संबंधी सीमाएं तथा स्थान की कमी है। इस कारण भविष्य की ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रखरखाव आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन है। इसकी भौगोलिक संरचना तथा घंटी-आकार (बेल कर्व) का यार्ड लेआउट भविष्य के विस्तार को लेकर अनुपयुक्त है। वर्तमान में उपलब्ध आठ वॉशिंग पिट केवल हटिया आधारित मौजूदा ट्रेनों के रखरखाव की आवश्यकताओं को ही किसी तरह पूरा कर पा रहा है। बालसिरिंग स्टेशन की सड़क संपर्क व्यवस्था अत्यंत उत्कृष्ट है। रांची रिंग रोड स्टेशन से मात्र 500 मीटर की दूरी पर है। बलसिरिंग, हटिया से लगभग छह किमी, रांची एयरपोर्ट से आठ किमी तथा रांची शहर केंद्र से लगभग 13 किमी दूर स्थित है।
विकास को ध्यान में रख कर बनी योजना
रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए प्रमुख शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार करने की योजना बनायी है, ताकि भीड़भाड़ कम हो और यात्री सुविधाओं में सुधार हो। यह पहल रेलवे नेटवर्क को उन्नत करेगी और देशव्यापी संपर्क को सुदृढ़ करेगी। अगले पांच वर्षों में प्रमुख शहरों के लिए नयी ट्रेनें शुरू करने की क्षमता को वर्तमान स्तर से दोगुना किये जाने की योजना है। इसके तहत अतिरिक्त प्लेटफार्म, स्टेबलिंग लाइन, पिट लाइन एवं पर्याप्त शंटिंग सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेंगी।







