रांची। झारखंड के उन 15 मजदूरों के परिजनों के चेहरों पर चमक लौट ई है। वे खुश हो भी क्यों न, उनके बच्चे अब टनल से बाहर निकलने जो लगे हैं। सभी के परिवार वाले टनल बाहर खड़े अपनों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। खुदाई में लगी टीम टनल के अंदर पहुंच गई है।
उत्तराखंड की सिल्क्यारा-डंडालगांव टनल में 12 नवंबर से फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने का काम शुरू हो चुका है। एनडीआरएफ की टीम कुछ देर में 16 दिन से फंसे 41 मजदूरों को टनल से बाहर लाएगी। टनल के अंदर एम्बुलेंस के अलावा स्ट्रेचर और गद्दे पहुंचाए गए हैं। यहां अस्पताल बना दिया गया है। रेस्क्यू के बाद मजदूरों को यही रखा जाएगा।
बता दें कि उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधीन टनल में फंसे झारखंड के श्रमिकों का हाल जानने के लिए गए परिजनों को हर सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परिजनों को हर सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। टनल में फंसे झारखंड के सभी 15 श्रमिक सुरक्षित हैं। इसमें गिरिडीह के दो खूंटी के तीन रांची के तीन एवं पश्चिमी सिंहभूम के सात श्रमिकों के फंसे हैं। संबंधित जिला के डीसी लगातार श्रमिकों के परिजनों से बातचीत कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
इसके अलावा प्रवासी नियंत्रण कक्ष के माध्यम से भी अधिकारी टनल में फंसे श्रमिकों के परिजनों से लगातार संपर्क में है। मुख्यमंत्री के आदेश पर श्रमिकों के परिवार के सभी सदस्यों के रहने, खाने-पीने की व्यवस्था की गई है। श्रमिकों और परिवारों को जैकेट, टोपी और कंबल भी दिये गये हैं।
परिजनों के साथ मौके पर पहुंचे झारखंड के अधिकारियों ने यहां सरकार को सूचित किया है कि मजदूरों को टनल से निकलने के बाद 35 किलोमीटर दूर चिन्यालीसौड़ ले जाया जाएगा। जहां 41 बेड का स्पेशल हॉस्पिटल बनाया गया है। अगर किसी मजदूर की हालत खराब हुई, तो उन्हें फौरन एयरलिफ्ट कर AIIMS ऋषिकेश भेजा जाएगा। फंसे हुए मजदूरों के लिए SDRF की टीम गद्दे लेकर टनल के अंदर पहुंच गई है।
इससे पहले, सिल्क्यारा साइड से हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग में लगे रैट माइनर्स, हादसे के 17वें दिन दोपहर 1.20 बजे खुदाई पूरी कर पाइप से बाहर आ गए। उन्होंने करीब 21 घंटे में 12 मीटर की मैन्युअल ड्रिलिंग की। 24 नवंबर को मजदूरों की लोकेशन से महज 12 मीटर पहले ऑगर मशीन टूट गई थी। जिससे रेस्क्यू रोकना पड़ा था। इसके बाद सेना और रैट माइनर्स को बाकी के ड्रिलिंग के लिए बुलाया गया था।
मंगलवार सुबह 11 बजे मजदूरों के परिजन के चेहरों पर तब खुशी दिखी, जब अफसरों ने उनसे कहा कि उनके कपड़े और बैग तैयार रखिए। जल्द ही अच्छी खबर आने वाली है। अब ये परिजन पलकें बिछाये बाहर खड़े हैं, कब उनके बच्चों की झलक उन्हें दिखे।








