सिमडेगा : बीरू गढ़ में सतघरवा नाम से प्रसिद्ध पुराने महल का अवलोकन शुक्रवार को आइटीआरएचडी के स्टेट एंबेसडर श्रीदेव सिंह और सिमडेगा डीसी अजय कुमार सिंह ने किया। मौके पर सतघरवा नाम से प्रसिद्ध पुराने महल के जीर्णोद्धार पर चर्चा हुई। देखरेख के अभाव में यह महल जीर्ण-शीर्ण हो गया है। इसकी दीवारें टूट कर गिर गयी हैं और परिसर में बड़े-बड़े पेड़ उग आये हैं। इस अवसर पर जे पी चौधरी, कार्यपालक अभियंता, विशेष प्रमंडल तथा चंदन कुमार और अजय कुमार मुखर्जी भी उपस्थित रहे।
पुराने महल में बड़े घनाभ आकार के पत्थरों से बने दीवार और चौखट प्राचीन उच्च श्रेणी की वास्तुशिल्प से रूबरू कराती है। इन पत्थरों पर उकेरी गई मां लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा साफ तौर पर देखी जा सकती है। 1935 के दौर में आए भूकंप में पूरा महल जमीन के अंदर धंस गया,पर उसका भग्नावशेष आज भी सुरक्षित है। किंवदंती है कि बीरू साम्राज्य बाकुड़ा हीरा के बदले मिला था। बीरू गढ़ के पूर्वजों ने यह बेशकीमती हीरा लेकर चुटिया नागपुर महाराजा दुर्जन शाल की रानी को दिया था।
हालांकि तब दुर्जन शाल दिल्ली के मुगल सम्राट जहांगीर के कैद में थे। बाद में बीरू गढ़ के पूर्वज और दुर्जन शाल के हितैषियों की मदद से जहांगीर के कैद से दुर्जन शाल को छुड़ाया गया था। इसी बात से प्रसन्न होकर दुर्जन सिंह ने ताम्र पत्र पर भीमसिह देव को बीरू रियासत सौंपी थी। बीरू रियायत ने जिले में धर्म,शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्र में कई उल्लेखनीय योगदान दिया है। राजा हरेराम सिंह देव ने रामरेखाधाम की खोज की थी।
रामरेखाधाम के नाम से 62 एकड़ जमीन भी दी गई।श्रीनिवास हुकुम सिंह देव ने रामरेखाधाम में कार्तिक मेला तो राजा धनुर्जय सिंह देव ने कार्तिक मेला का शुभारंभ कराया था। इन्होंने लंबोई में हाई स्कूल की स्थापना कराई। इसी तरह राजा धर्मजीत सिंह देव ने गांधी मैदान के लिए 5.70 एकड़ जमीन दी,तो श्री निवास हुकूम सिंह देव ने 51 एकड़ लीज पर जमीन देकर सिमडेगा शहर बसाई।इसके अतिरिक्त यूसी-संत मेरीज स्कूल के लिए भी 100 एकड़ जमीन लीज पर दी थी।







