दयानंद राय
दुमका : मंदिरों के गांव मलूटी में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़े मंदिरों की किस्मत चमकनेवाली है। बुधवार को मंदिरों के जीर्णोद्धार का सेकेंड फेज का काम शुरू हो गया। सेकेंड फेज में कुल 42 मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जायेगा। जबकि पहले फेज में 20 मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जा चुका है। यहां कुल 62 मंदिर हैं। मंदिरों का जीर्णोद्धार करा रहे आइटीआरएचडी के हेरिटेज एंबेसडर श्रीदेव सिंह ने बताया कि जीर्णोद्धार का काम शुरू हो चुका है। दो साल में काम पूरा होने की संभावना है। मंदिरों के जीर्णोद्धार में करीब 6.75 करोड़ की लागत आयेगी। जिसमें पहले चरण में सवा तीन करोड़ खर्च हो चुके हैं वहीं दूसरे फेज में साढ़े तीन करोड़ और खर्च होंगे। श्रीदेव सिंह ने बताया कि दूसरे फेज का काम शुरू करने से पहले उन्होंने मां मौलीक्षा की पूजा की और उनका आशीर्वाद लिया।
मजदूरों की टीम को हेड कर रहे हैं राजेंद्र मंडल
42 मंदिरों का जीर्णोद्धार कर रही टीम में शुरूआती स्तर पर 22 मजदूर लगाये गये हैं। इन्हें राजेंद्र मंडल हेड कर रहे हैं। उन्हें आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानि एएसआई के साथ काम करने का 25 वर्षों का अनुभव है। वे एक कुशल राजमिस्त्री हैं और उन्हें सुर्खी चूने से बनी इमारतों और मंदिरों के रेस्टोरेशन का लंबा अनुभव है। काम के पहले दिन मंदिरों में उग आए पेड़ों की जड़ों को हटाया गया और उनकी साफ-सफाई की गयी।
प्राचीन स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना हैं मंदिर
मलूटी में कुल 108 मंदिर बनाये गये थे पर देखरेख के अभाव में अब केवल 62 मंदिर ही बचे हैं। ये सभी प्राचीन स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना हैं। इन मंदिरों की ऊंचाई अधिकतम 60 फीट और न्यूनतम 15 फीट है। इन मंदिरों का निर्माण सन 1720 से 1845 के बीच में कराया गया था। सभी मंदिरों के सामने के भाग में नक्काशी की गयी है और उनमें विभिन्न देवी देवताओं के चित्र तथा रामायण के दृश्य उकेरे गये हैं।
पहला मंदिर जमींदार राखड़चंद्र राय ने बनवाया था
मलूटी में पहला मंदिर 1720 ईस्वी में वहां के जमींदार राखड़चंद्र राय के द्वारा बनवाया गया था। राजा बाज बसंत के परम भक्त राखड़चंद्र राय तंत्र साधना में विश्वास करते थे और वे मां तारा की पूजा के लिए नियमित रूप से तारापीठ जाते थे। मलूटी से तारापीठ की दूरी 15 किमी है। बाद में मलूटी ननकर राज्य के राज बाज बसंत के वंशजों ने इन मंदिरों का निर्माण कार्य कराया। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार गौड़ राज्य के बादशाह अलाउद्दीन हुसैन शाह 1493-1519 की ओर से दी गयी जमीन पर कर मुक्त राज्य मलूटी की स्थापना की गयी थी।







