रणधीर वर्मा की बहादुरी का आज भी कायल है झारखंड
धनबाद। तीन जनवरी 1991। इस दिन को आज तक धनबाद के लोग नहीं भूले हैं। इस दिन की चर्चा होते ही शहर के लोगों को अपने जाबांज एसपी रणधीर प्रसाद वर्मा एवं आइएसएम कर्मी श्यामल चक्रवर्ती का बलिदान याद आ जाता है। कैसे इस जांबाज पुलिस अधिकारी ने अपनी जान देकर पंजाब के आतंकियों को आगे बढ़ने से रोक दिया था।
रणधीर वर्मा ने बलिदान देकर खालिस्तानी आंतकवादियों की न सिर्फ धनबाद, बल्कि पूरे झारखंड में एंट्री रोकी थी। पहली बार आंतकवादी धनबाद के बैंक में डाका डालने पहुंचे थे। पहले प्रयास में ही वे ढेर हो गए थे। यदि वे सफल हो जाते तो आतंकवादियों का एक सेंटर झारखंड में भी खुल जाता।
आइए अब हम इस जांबाज पुलिस अफसर की बहादुरी की गाथा बताते हैं। वो तीन जनवरी की सुबह थी। धनबाद शहर अलसाया हुआ था। नये साल की मस्ती का खुमार अभी उतरा भी नहीं था। ऊपर से कड़ाके की ठंड ने लोगों को घर से बाहर निकलने से रोक रखा था। सुबह के करीब दस बज रहे थे। एसपी रणधीर वर्मा एसपी कोठी में थे। तभी उन्हें किसी ने फोन किया कि हीरापुर बिनोद मार्केट स्थित बैंक आफ इंडिया में डकैत घुस गए हैं।
सूचना मिलते ही वह पिस्टल और एक अंगरक्षक को लेकर सीधे बैंक पहुंच गए। बैंक प्रथम तल पर था। डकैतों को ललकाराते हुए रणधीर वर्मा सीढ़ी चढ़ गए। तभी ऊपर मौजूद एक आतंकवादी ने उन्हें गोली मार दी। गोली लगते ही वह गिर पड़े। बावजूद इसके उन्होंने एक डकैत को गोली मारकर ढेर कर दिया। इसके बाद वह किसी प्रकार खड़े होकर गोली चलाते हुए बैंक के मेन गेट तक पहुंच गये। उस समय आइएसएम के कर्मचारी श्यामल चक्रवर्ती भी बैंक में मौजूद थे।
उन्हों ने भी डकैतों का विरोध किया। डकैतों ने उन्हें भी गोली मार दी। इधर रणधीर वर्मा का अंगरक्षक भी गोली लगने से जख्मी हो गया। तब तक धनबाद थाना की पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। खुद को घिरते देख डकैत भागने लगे। बाद में एक और डकैत को पुलिस ने मार गिराया। शहीद रणधीर वर्मा ने अपने प्राण की आहुति देकर न केवल पुलिस के लिए अनुकरणीय मिसाल कायम की थी, बल्कि अशोक-चक्र पदक के दिए जाने के मामले में भी इतिहास बनाया।
वह पहले सिविलियन थे, जिन्हें मरणोपरांत 26 जनवरी 1991 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकटरामन ने शांतिकाल में वीरता के लिए दिए जाने वाले सर्वश्रेष्ठ पदक अशोक-चक्र सम्मानित किया था। वेंकटरामन ने अपने संदेश में कहा था कि श्री रणधीर प्रसाद वर्मा ने देश के पुलिसकर्मियों के लिए साहस, नेतृत्व और निस्वार्थ कर्तव्यपरायणता का महान उदाहरण पेश किया। यद्यपि श्री वर्मा और उनके सुरक्षा गार्ड संख्या में कम थे। फिर भी उन्होंने बैंक लुटेरों से से मुकाबला करने का साहसिक निर्णय लिया और अपने जीवन का बलिदान देकर असाधारण वीरता का परिचय दिया।
खालिस्तानी आंतकवादियों से लड़ते हुए जान देने वाले एसपी रणधीर वर्मा को 26 जनवरी 1991 को वीरता के लिए सर्वोच्च पदक अशोक-चक्र से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने सन 2004 में उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया था। रणधीर वर्मा की शहादत के बाद राष्ट्रपति से लेकर देश की नामचीन हस्तियां जिस तरह उद्वेलित हुई हुई थीं, यह अपने आप में अनोखा इतिहास है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि श्री रणधीर वर्मा निस्वार्थ कर्तव्यपरायणता और साहस की प्रतिमूर्ति थे।
उनका वास्तविक सम्मान तभी होगा, जब पुलिस के लोग उनके बलिदान से प्रेरणा लेकर अपने कर्तव्य का पालन करेंगे। राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता रहे सिकंदर बख्त ने कहा था – हमारे देश को, हमारी आरक्षी सेवा को शहीद रणधीर वर्मा की कर्तव्यनिष्ठा पर फक्र है। जीवन से बड़ा बलिदान और कुछ नहीं हो सकता। देश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारतीय पुलिस सेवा को रणधीर वर्मा जैसे सपूतों की आवश्यकता है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरलीमनोहर जोशी कहा था कि रणधीर वर्मा एक ऐसे देशभक्त वीर थे, जिन्होंने आतंकवाद के विरूद्ध संघर्ष में अपना जीवन होम कर दिया। अपने बलिदान द्वारा प्रशासनिक सेवाओं के लिए उन्होंने अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत किया था। ऐसे कर्तव्यनिष्ठ एवं देशभक्त नरपुंगव को श्रद्धांजलि। भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिहं ने कहा था – देश के मौजूदा हालात को देखते हुए शहीद रणधीर वर्मा जैसे वीरों की याददाश्त ताजी रखना व्यक्ति पूजा नहीं, देश को सही मूल्यों के प्रति सचेत रखने की दिशा में एक आवश्यक कदम हो।
वहीं, रणधीर वर्मा के साथ बलिदानी हुए आइएसएम कर्मी श्यामल चक्रवर्ती को आज भी सरकार की ओर से सम्मान नहीं मिला है। श्यामल चक्रवर्ती को नागरिक सम्मान दिलाने के लिए लड़ाई कामरेड एके राय ने शुरू की थी। वामपंथियों की यह लड़ाई आज भी जारी है। बलिदान दिवस पर एक बार फिर आवाज उठेगी। रणधीर वर्मा को उनके 33वें बलिदान दिवस पर रणधीर वर्मा चौक पर सादे समारोह में श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस मौके पर धनबाद सशस्त्र बल की ओर से शहीद को सलामी दी जाएगी। रणधीर वर्मा के बलिदान के बाद से प्रति वर्ष रणधीर वर्मा चौक पर उनकी आदमकद प्रतिमा के समक्ष संगीतमय श्रद्धांजलि दी जाती रही है।
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