चान्हो के जंगल में दी जानी थी आतंकी ट्रेनिंग [Terrorist training was to be given in Chanho forest]

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कैंप खोलने की थी योजना, मदरसा में युवाओं को किया जा रहा था प्रेरित

रांची। आतंकी संगठन अलकायदा मॉड्यूल के मास्टरमाइंड डॉ. इश्तियाक अहमद से जुड़ी बड़ी जानकारी सामने आई है।

इश्तियाक चान्हो के चटवल में मदरसा संचालक मुफ्ती रहमतुल्लाह के साथ अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट आतंकी संगठन (एक्यूआईएस) से युवाओं को जोड़ रहा था।

उन्हें चान्हो के जंगल में सेंटर बनाकर हथियार का प्रशिक्षण देने की तैयारी थी। इसी उद्देश्य से मुफ्ती रहमतुल्लाह चटवल के एक सुनसान जगह में मदरसा चला रहा था।

यहां आम लोगों का आना जाना नहीं के बराबर था। अभी मदरसे में युवकों को संगठन के काम की जानकारी दी जाती थी।

डॉ इश्तियाक काफी शातिर है। रांची, लोहरदगा और हजारीबाग में एटीएस व दिल्ली पुलिस ने छापेमारी की थी।

तीनों जगहों पर डॉ. इश्तियाक नर्सिंग होम और लैब से जुड़ा था। रांची में वह छह साल से मेडिका में काम कर रहा था।

अब ईडी भी जमीन घोटाला केस में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अलकायदा लिंक भी तलाशेगी। जमीन घोटाले के इस केस में ईडी ने बरियातू के लेक व्यू अस्पताल के संचालक बबलू खान को समन किया है। बबलू खान को 26 अगस्त की सुबह 11 बजे रांची कार्यालय में बुलाया गया है।

ईडी को जानकारी मिली है कि बरियातू स्थित लेक व्यू अस्पताल का लाइसेंस अफसर अली के नाम पर है। लेकिन, उसका संचालन बबलू खान कर रहा था।

वह डॉ. इश्तियाक का सहयोगी भी है। अब ईडी को शक है कि जमीन घोटाले के जरिए जुटाए धन का आतंकी गतिविधियों में तो उपयोग नहीं हो रहा था।

बरियातू का बबलू खान जमीन घोटाले में गिरफ्तार अफसर अली का भाई है। अफसर अली रिम्स के रेडियोलोजी विभाग में एक्सरे टेक्नीशियन था।

उसे ईडी ने पिछले वर्ष सेना के उपयोग वाली भूमि की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री मामले में गिरफ्तार किया था।

उसका सहयोगी तल्हा खान भी गिरफ्तार हुआ था। ईडी ने जिस बबलू खान को समन किया है, वह तल्हा खान का भी करीबी रिश्तेदार है।

इश्तियाक 22 माह से हजारीबाग के पैथोलॉजी में कर रहा था काम

इश्तियाक पिछले 22 माह से हजारीबाग आना-जाना कर रहा था। वह नवाबगंज रोड स्थित आइडियल पैथोलॉजी में बतौर रेडियोलॉजिस्ट काम कर रहा था।

पैथोलॉजी के संचालक नावेद अख्तर ने कहा कि डॉ. इश्तियाक 5 दिसंबर 2022 से मेरे लैब में काम कर रहा था।

वह रविवार को छोड़कर हर रोज दोपहर 12:30 बजे आता था और शाम 4 बजे लौटता था। यह पूछे जाने पर कि इश्तियाक से फैजान अहमद का संपर्क कैसे हुआ?

नावेद ने कहा कि रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत थी, इसी क्रम में मेडिका में कार्यरत डॉ. इश्तियाक ने हमारे लैब से संपर्क किया।

उन्होंने कहा कि लैब के डॉक्टर ग्राउंड फ्लोर पर बैठते हैं। मैं फर्स्ट फ्लोर पर रहता हूं। नीचे कौन किससे मिलने आ रहा है, यह पता नहीं चलता था।

इश्तियाक की फैजान से कब मुलाकात हुई इसकी जानकारी नहीं है। एटीएस के अनुसार फैजान अहमद का आइडियल पैथोलॉजी में काम करने से पहले से डॉ. इश्तियाक से संपर्क था। लैब में रेडियोलॉजिस्ट की वैकेंसी की सूचना इश्तियाक तक पहुंचाने वाला फैजान ही है।

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