रांची। झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर कमीशन के राज परत दर परत खुलते जा रहे हैं।
ईडी ने मंत्री आलमगीर आलम के पीए संजीव लाल और उसके सहायक जहांगीर आलम के घर से मिले सबूतों की जांच के बाद विस्फोटक खुलासा किया है।
इस खुलासे में पता चला है कि ग्रामीण विकास विभाग में कमीशन का खेल कोड वर्ड में चलता था।
मंत्री से लेकर पीए तक के लिए एच, एम, एस, टीसी, सीइ जैसे कोड वर्ड निर्धारित थे। मंत्री से अधिकारी तक हर स्तर पर कमीशन का रेट फिक्स था।
इस ताजे खुलासे के बाद ईडी को अब किसी मनीष की तलाश है, क्योंकि जब्त सबूतों से पता चला है कि कमीशन की भारी भरकम रकम का भुगतान इस मनीष को भी किया गया है।
बताते चलें कि ईडी को संजीव लाल और जहांगीर आलम के घर से रुपयों के साथ कमीशन की पैसों के बंटवारे और उसके हिस्सेदारों का ब्योरा भी मिला है।
इस ब्योरे में कमीशन की रकम में हिस्सा लेनेवालों के नाम के बदले कोड वर्ड का इस्तेमाल किया है।
हिस्सेदारों के लिए एच मतलब ऑनरेबल मिनिस्टर, एम मतलब मनीष, एस मतलब संजीव लाल, टीसी मतलब टेंडर कमेटी, सीइ मतलब चीफ इंजीनियर जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल किया गया है।
ईडी ने जांच में मिले इन तथ्यों से संबंधित कुछ सबूत बतौर नमूना पीएमएलए के विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश भी किया है।
ईडी का अनुमान है कि मनीष नामक व्यक्ति का कमीशन 4.22 करोड़ और मंत्री का 7.30 करोड़ है।
बता दें कि मंत्री के आप्त सचिव संजीव लाल, निजी सहायक जहांगीर और अन्य के ठिकानों से ईडी को 37.41 करोड़ रुपये मिले थे।
वहीं, संजीव लाल के घर से मिले एक्सेल शीट में हिस्सेदारी का विस्तृत ब्योरा है।
ईडी ने न्यायालय को जांच में मिले तथ्यों की भी जानकारी दी है। साथ ही इससे संबंधित कुछ सबूत भी पेश किये हैं।
ईडी ने संजीव लाल के घर से एक्सेल शीट भी बतौर सबूत पेश किया है। इस एक्सेल शीट में योजना का नाम, ठेकेदार का नाम, टेंडर की कुल राशि, कुल कमीशन और इसमें मंत्री की हिस्सेदारी का विस्तृत ब्योरा दर्ज है।
इस शीट के क्रमांक 75 पर बोकारो प्रमंडल के भस्की पंचायत के जोरिया गांव में तालाब से जुड़ी योजना का नाम है।
282.177 लाख रुपये का यह काम अशरफ कंस्ट्रक्शन को मिला है। टेंडर की राशि में कुल कमीशन 8.40 लाख रुपये होने का उल्लेख है। कमीशन की इस रकम में मंत्री की हिस्सेदारी 3.78 लाख रुपये दर्ज है।
एक्सेल शीट के पहले पन्ने पर मंत्री का कुल कमीशन 2.73 करोड़ रुपये दर्ज है। ईडी द्वारा इससे पहले कोर्ट को यह जानकारी दी जा चुकी है कि बीरेंद्र राम ने मंत्री आलमगीर आलम को तीन करोड़ रुपये बतौर कमीशन देने की बात स्वीकार की थी।
ईडी ने कोर्ट में कमीशनखोरी और बंटवारे से संबंधित दो और पेज कोर्ट में पेश किया है। इसमें से एक पेज में सबसे ऊपर एलओए 1970.05 करोड़ रुपये लिखा है।
जांच में पता चला कि एलओए का अर्थ लेटर ऑफ अलॉटमेंट है। इसके क्यूईडी और डीटी शब्द लिखा है। इसके बाद राशि का उल्लेख किया गया है।
इन दोनों कोड वर्ड का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। इस पन्ने पर एम यानी मनीष का 4.22 और एच एम ऑनरेबल मिनिस्टर के आगे 7.30 लिखा है।
ईडी का अनुमान है कि मनीष नामक किसी व्यक्ति का कमीशन 4.22 करोड़ और मंत्री का 7.30 करोड़ रुपये है।
इसी पेज में किसी उमेश के नाम के आगे 1.75 करोड़ रुपये और कमेटी यानी टेंडर कमेटी के आगे 27.5 लाख रुपये लिखा हुआ है।
इससे यह पता चलता है कि विभाग में हर स्तर के अधिकारियों का कमीशन तय था और उसका बंटवारा भी उसी के अनुरूप किया जाता है।
इसी पेज में ऑफिस के आगे 3.465 करोड़ लिखा है। ईडी का अनुमान है यह कार्यालय के अन्य लोगों के बीच बंटे कमीशन का ब्योरा है।
ईडी की ओर से कोर्ट में पेश किये गये तीसरे पन्ने में विभागवार कमीशन का हिसाब लिखा हुआ है।
इसी में संजीव लाल ने अपनी हिस्सेदारी के लिए अपना शब्द का इस्तेमाल किया है। इस पन्ने में एसपीएल यानी स्पेशल डिवीजन के आगे 52 और तिथि 25-9-2023 लिखा है।
ईडी का अनुमान है कि स्पेशल डिवीजन के माध्यम से लागू योजनाओं में कमीशन की यह राशि मिली है।
इसी तरह आरइओ यानी रुरल इंजीनियरिंग ऑर्गनाइजेशन से 30 सितंबर 2023 को रुपये मिलने का उल्लेख किया गया है।
हालांकि 49.35 के आगे लाख या करोड़ नहीं लिखा है। इसी तरह तीसरे पन्ने में अपने लिए यानी संजीव लाल के लिए दो जगह कमीशन में हिस्सेदारी का उल्लेख है।
एक जगह 40 और दूसरी जगह 25 का उल्लेख किया गया है। इसी पन्ने के अंत में राजीव जी से 30 और 60 मिलने का उल्लेख है।
राजीव जी का अर्थ ठेकेदार राजीव सिंह से है। जहांगीर के घर से मिले 32.20 करोड़ रुपये में से 10 करोड़ रुपये राजीव के माध्यम से ही पहुंचे थे।
दस्तावेज में लिखे अन्य कोड वर्ड का पता लगाने के प्रयास में ईडी के अधिकारी जुटे हुए हैं।
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